मुंबई: बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि घरेलू हिंसा अधिनियम के मामले में अगर बच्चा मां के संरक्षण में है तो पिता बच्चे से मिलने का अधिकार मांग सकता है. न्यायमूर्ति प्रकाश नाइक ने बीते शुक्रवार को एक महिला द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया जिसमें सत्र अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसके तहत उससे अलग रह रहे पति को बच्चे से मिलने का अधिकार दिया गया था. Also Read - Sushant Singh Rajput death case: सुशांत सिंह मौत मामले की कवरेज पर हाई कोर्ट सख्त, कहा- कानून का उल्लंघन है ‘मीडिया ट्रायल’

महिला ने अपनी याचिका में दावा किया था कि सत्र अदालत ने आदेश पारित करने में चूक की क्योंकि घरेलू हिंसा से महिला के संरक्षण अधिनियम की धारा 21 के तहत सिर्फ एक वंचित महिला ही बच्चे के संरक्षण या उससे मिलने का अधिकार मांग सकती है. Also Read - BMC ने HC से कहा- सोनू सूद एक 'आदतन अपराधी' हैं, एक्टर ने शरद पवार से की मुलाकात

याचिका में यह भी दावा किया गया कि एक व्यक्ति हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 26 के तहत ही बच्चे के संरक्षण की मांग कर सकता है. महिला के पति ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि वह इस चरण में बच्चे के स्थायी संरक्षण की मांग नहीं कर रहा, बल्कि सिर्फ उससे मिलने-जुलने का अधिकार मांग रहा है. Also Read - 6 साल की नेत्रहीन बेटी से बनाता था संबंध, पत्नी से ऐसे बचकर करता था वारदात, फिर...

न्यायमूर्ति प्रकाश नाइक ने अपने आदेश में कहा कि अगर पत्नी द्वारा बढ़ाई गई व्याख्या को स्वीकार किया जाता है, तो यह घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम के उद्देश्य को ही नाकाम कर देगा.