नई दिल्‍ली/नागुपर: महाराष्‍ट्र विधानसभा के अध्‍यक्ष बने 57 साल के नाना पटोले की राजनीति की पारी की शुरुआत की दस्‍तां भी बड़ी रोचक है. छात्र राजनीति में कॉलेज के दोस्‍तों के बीच नाना बेहद लोकप्रिय थे और इन्‍हीं दोस्‍तों के समर्थन के चलते उन्‍होंने अपनी मैदानी राजनीतिक पारी की शुरुआत जिला पंचायत सदस्‍य के चुनाव से की थी. इस पहले मैदानी चुनाव में पटोले के पास इतने पैसे भी नहीं थे, कि वह प्रचार कर पाते. ऐसे वक्‍त मेें उनके बड़े भाई ने मदद की थी, वह भी अपने पिता से छिपाकर.

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नाना को पंचायत सदस्‍य का चुनाव लड़ने के लिए पैसों की जरूरत थी, लेकिन वह किसी से मांग नहीं सके. आखिर उन्‍होंने अपने बड़े भाई विनोद पटोले से मंशा बताई तो भाई ने कहा कि तुम कई बड़े दिग्‍गजों के बीच में चुनाव में कूदने जा रहे हो. आखिर जीतोगे कैसे तो नाना ने कहा कि बस दो वाहनों का इंतजाम कहीं से हो जाए और कुछ जेब खर्च के लिए पैसे मिल, बाकी मुझ पर छोड़ दीजिए. मैं चुनाव जीतकर दिखाऊंगा. पुलिस इंस्‍पेक्‍टर के पद पर तैनात बड़े भाई ने प्रचार के लिए दो कारों का इंतजाम कर दिया और जेब खर्च के लिए कुछ पैसे दे दिए. इसके बाद जब चुनाव का रिजल्‍ट सामने आया तो पटोले ने मैदान जीत लिया.

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काम आई थी कॉलेज की यारी
महाराष्‍ट्र विधानसभा अध्‍यक्ष की आज कुर्सी संभालने वाले नाना पटोले के राजनीतिक सफर की यह पहली दास्‍तां साल 1991 की है, जब वह भंडारा जिला परिषद के सदस्य बने. पैसों की कमी के बावजूद चुनाव जीतने के बाद बड़े भाई ने नाना से पूछा, अच्‍छा बताओ तुम चुनाव कैसे जीत गए तो उन्‍होंने बताया कि कॉलेज में इतने साल छात्र राजनीति की. सारे दोस्‍तों ने साथ दिया तो चुनाव जीत गया.

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पिता बहुत नाराज थे दोनों भाइयों से
पटोले के पिता फाल्‍गुनराव पटोले एक किसान थे, लेकिन वह गांधी और विनोबा भावे से बहुत प्रभावित थे. वह राजनीति और पुलिस विभाग में अपने बेटों के जाने के खिलाफ थे. नाना के बड़े भाई विनोद ने एमएससी करने के बाद पुलिस विभाग में नौकरी ज्‍वाइन की तो पिता बहुत नाराज हुए थे. वह नाना की राजनीति में सक्रिता को लेकर काफी नाराजगी रखते थे. हालांकि वह जनसेवा को बहुत महत्‍व देते थे. बड़े भाई विनोद को जब पुलिस अधिकारी की ट्रेनिंग के लिए जाना तो पिता ने खर्च के पैसे नहीं दिए थे. विनोद को उनकी मां ने पति की बिना जानकारी के अपने हाथ का एक कंगन बेंचकर पैसे दिए थे. जब नाना चुनाव में खड़े हुए तो मां ने अपनी गुल्‍लक के पैसे निकालकर दिए थे. बड़े भाई विनोद पुलिस की नौकरी तो करने लगे थे, लेकिन कई साल तक वह पिता के सामने जाने का साहस नहीं कर पाए थे. नाना के परिवार में दो बेटियां और एक बेटा है.

(बड़े भाई व‍िनोद पटोले व परिवार के अन्‍य सदस्‍यों के साथ नाना पटोले (फोटो: फेसबुक)

छात्र राजनीति से बढ़ा हौसला
बता दें विदर्भ के भंडारा जिले में साकोली तहसील के लखनी गांव में 1962 में एक किसान परिवार में जन्मे पटोले ने नागपुर विश्वविद्यालय से 1987 में विश्वविद्यालय प्रतिनिधि बने. इस दौरान कॉलेज के बहुत से छात्र उनके दोस्‍त थे. कॉमर्स विषय में स्नातक करने के बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए और 1991 में भंडारा जिला परिषद के सदस्य बने.

एनसीपी के दिग्‍गज प्रफुल्‍ल पटेल को भी हराया था
पटोले 1999 में पहली बार विधानसभा पहुंचे और 2004 और 2009 में भी साकोली-लाखनी सीट से राज्य विधानसभा चुनाव जीते. पटोले ने कांग्रेस छोड़ दी और भंडारा-गोंदिया लोकसभा से प्रफुल्‍ल पटेल के खिलाफ निर्दलीय ताल ठोक दी. इस चुनाव में हालांकि वह हार गए लेकिन बड़े वोट मार्जिन से दूसरे स्‍थान पर रही और उनसे बहुत पीछे बीजेपी का उम्‍मीदवार रह गया. इस बाद भाजपा ने उन्‍हें 2014 में इसी सीट पर एनसीपी के दिग्‍गज प्रफुल्‍ल पटेल के खिलाफ खड़ा किया तो उन्‍होंने बड़े मार्जिन से जीत हासिल की.

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बड़े भाई चाहते थे कि सांसद पद से नहीं दें स्‍तीफा
बड़े भाई विनोद पटोले ने चाहते थे कि नाना बीजेपी सांसद पद से इस्‍तीफा दें, लेकिन नाना ने साफ कर दिया कि वह बीजेपी में नहीं रह सकते. हालांकि विनोद अपने परिचतों को नाना के यहां तक भी ले जाते थे कि आप मेरे छोटे भाई को समझाएं. एक बार विनोद अपने एक परिचित के साथ नाना निवास पर पहुंचे तो वह पहले कहीं चले गए थे ताकि उन्‍हें इस्‍तीफे के फैसले पर प्रभावित नहीं किया जा सके.

गडकरी के खिलाफ भी ताल ठोकी
पटोले ने दिसंबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फडणवीस से मतभेदों का हवाला देते हुए भाजपा छोड़ दी और कांग्रेस में लौट आए. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से उन्‍हें नागपुर में केंद्रीय मंत्री नितिन पटेल के खिलाफ उतारा. वह जीत तो नहीं पाए लेकिन गडकरी की पिछली जीत का वोट मार्जिन कम करने में कामयाब रहे. पटोले इस विधानसभा चुनाव में फडणवीस के करीबी सहायक और राज्य के मंत्री रहे परिणय फुके को हराकर साकोली विधानसभा सीट से चौथी बार जीते.
(तथ्‍य: नाना पटोले के परिवार के सदस्‍य से हुई बातचीत के बिंदु)