महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कौन से मुद्दे होगें सबसे अहम ? महा विकास आघाड़ी और महायुति में किसका खेमा कितना मजबूत ?

288 सदस्यों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत प्राप्त करने के लिए 145 सीटों की आवश्यकता होती है.आगामी विधानसभा के चुनाव में महायुति गठबंधन का मुख्य मुकाबला महा विकास आघाड़ी (MVA)गठबंधन से है जिसका की कुछ महीने पहले ही हुए लोकसभा के चुनाव में प्रदर्शन काफी शानदार रहा था और जिसे आगामी विधानसभा चुनाव के लिहाज से काफी मजबूत भी माना जा रहा है.

Published date india.com Updated: October 15, 2024 4:58 PM IST
Maharastra Political Leader
महाराष्ट्र के रण के राजनीतिक दिग्गज(फोटो साभार-सोशल मीडिया)

Maharashtra Election: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा आज 3.30 बजे चुनाव आयोग करेगा. इसे देखते हुए राज्य की राजनीति में सक्रिय सभी राजनीतिक दल और उनके प्रमुख नेता पूरी तरह से चुनावी मोड में आ गए है. 288 सदस्यों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत प्राप्त करने के लिए 145 सीटों की आवश्यकता होती है. वर्तमान में राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे है जो महायुति गठबंधन के शिवसेना पार्टी से आते है इस गठबंधन में भाजपा और अजित पवार की NCP भी शामिल है.

आगामी विधानसभा के चुनाव में महायुति गठबंधन का मुख्य मुकाबला महा विकास आघाड़ी (MVA) गठबंधन से है जिसका की कुछ महीने पहले ही हुए लोकसभा के चुनाव में प्रदर्शन काफी शानदार रहा था और जिसे आगामी विधानसभा के चुनाव के लिहाज से काफी मजबूत भी माना जा रहा है.

महा विकास आघाड़ी गठबंधन में कांग्रेस , शिवसेना(UBT)और NCP(शरद पवार) शामिल है. दोनों ही गठबंधन में अब तक सीट बंटवारें को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई है और न ही सीएम के चेहरे पर ही कोई आम सहमति हो पाई है. महाराष्ट्र के पिछले विधानसभा चुनाव में जनता ने भाजपा- शिवसेना(उद्धव ठाकरे ) को बहुमत दिया था लेकिन भाजपा से सीएम पद पर बात नहीं बन पाने की वजह से उद्धव ठाकरे ने भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया था और कांग्रेस और NCP (शरद पवार) के साथ मिलकर सरकार गठन किया था जिसका नेतृत्व खुद उद्धव ठाकरे ने ही किया था.उद्धव के भाजपा से अलग होने के कारण राज्य की राजनीति 360 डिग्री के ऐंगल पर घूम गई थी और जब से लेकर अब तक ये लगातार किसी न किसी नए ऐंगल(कोण) पर घूमती ही रही है.

आने वाले विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्र की राजनीति में कौन से मुद्दे अहम होने वाले है आइए समझने की कोशिश करते है.

छल-कपट से पार्टी चुराने और परिवार तोड़ने के आरोप का मुद्दा

राज्य की दो प्रमुख पार्टी शिवसेना(UBT)और NCP(SP)के प्रमुख दो नेता शरद पवार और उद्धव ठाकरे अपने तमाम बयानों में ये आरोप लगाते है कि उनकी पार्टी को छल कपट करके उनसे चोरी किया गया जोकि उनके साथ गद्दारी (विश्वासघात) है ये दोनों ही नेता राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रहे है और राज्य की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्र की राजनीति में भी अहम स्थान रखते है .उद्धव ठाकरे अपने बयानों में शिवसेना तोड़ने का मुख्य आरोपी एकनाथ शिंदे को बताते हुए उन्हें सीधे-सीधे गद्दार कहकर संबोधित करते है तो शरद पवार पार्टी और परिवार तोड़ने का आरोप अपने भतीजे अजित पवार पर लगाते हुए अपने तमाम बयानों में बस यही कहते है कि गलत करने वालों को जनता उचित सबक सही समय पर सीखा देती है.महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव में पार्टी तोड़ने (चुराने ) का मुद्दा काफी छाया रहा था और इसका नुकसान भी महायुति गठबंधन को उठाना पड़ा था, आगामी विधानसभा के चुनाव में ये मुद्दा कितना प्रभावी रहता है ये देखने वाली बात होगी .

महाराष्ट्र के उद्योग-धंधो को गुजरात ले जाने का आरोप

महाराष्ट्र के उद्योग-धंधे को गुजरात ले जाने की बहस 2022 में तब शुरू हुई थी जब पूणे के तालेगांव में लगने वाले 1.54 लाख करोड़ की वेदांता- फॉक्सकॉन सेमीकंडक्टर यूनिट को गुजरात के अहमदाबाद स्थानांतरित कर दिया गया था जिसके बाद विपक्षी महा विकास आघाड़ी गठबंधन के सभी नेता महायुति सरकार पर हमलावर हो गये थे. सत्ता पक्ष महायुति के कई नेताओं ने तब इस मुद्दो को संभालने की कोशिश तो की थी लेकिन आज भी ये मुद्दा राज्य की राजनीति में अहम बना हुआ है.इसके आलावा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ये आरोप लगाते है कि मुंबई की डायमंड इंडस्ट्रीज को भी धीरे-धीरे गुजरात के सूरत ले जाया जा रहा है.महा विकास आघाड़ी आरोप लगाती रही है कि भाजपा के दो प्रमुख नेता मोदी और अमित शाह देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से बदलकर अहमदाबाद करना चाहते है और इस लिए ही मुंबई का सारा कारोबार उठाकर गुजरात के बड़े शहरों में शिफ्ट किया जा रहा हैं.

लापरवाह प्रशासनिक व्यवस्था और भ्रष्टाचार

महा विकास आघाड़ी के सबसे वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र की राजनीति के भीष्म पितामह शरद पवार कहते है कि एक समय महाराष्ट्र की शासन व्यवस्था को देश में सबसे मजबूत शासन व्यवस्था के तौर पर देखा जाता था लेकिन महायुति सरकार के कार्यकाल में आज ये शासन व्यवस्था काफी लचर और कमजोर साबित हो रही है .कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले वर्तमान की एकनाथ शिंदे सरकार पर आरोप लगाते हुए कहते है कि इस सरकार ने छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा लगाने तक में भी भ्रष्टाचार किया है जिससे की प्रतिमा बनने के कुछ समय बाद ही ढह गई साथ ही राज्य में महिलाओं के खिलाफ लगातार अपराध बढ़ रहे हैं जो सत्ताधारी महायुती गठबंधन का सबसे ‘ गंभीर पाप ‘ है.

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MVA का दावा लोकसभा चुनाव की तरह ही होगें विधानसभा चुनाव के परिणाम

2024 में हुए लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की 48 सीटों पर MVA का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा था,गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 48 में 30 सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि महायुति को राज्य और केन्द्र की सरकार में रहने के बावजूद केवल 17 सीटें ही मिली थी.राज्य की सांगली लोकसभा की सीट से जिस निर्दलीय प्रत्याशी की जीत हुई थी उसने भी अपना समर्थन MVA को ही दे दिया था.

मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण (मेरी लाडली बहन) योजना

महाराष्ट्र में महायुति की सरकार ने इसी साल जुलाई में जब लाडकी बहीण योजना की घोषणा की तो तमाम राजनीतिक विष्लेश्कों ने इस योजना को राज्य की एकनाथ शिंदे सरकार का चुनावी ऐजेंडा बताया. शिंदे सरकार की इस योजना के अंतर्गत 2.5 लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले महाराष्ट्र निवासी परिवारों की 21 से 65 साल की आयु वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक मदद सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है. इस योजना पर बोलते हुए MVA के प्रमुख नेता शरद पवार ने कहा कि महिलाओं के आत्मसम्मान को बढ़ाने के लिए स्कीम को लागू किया जाता है तो हम भी वैसी योजनाओं का खुलकर सपोर्ट करते हैं लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि शिंदे सरकार की यह स्कीम स्थायी है या अस्थायी है.इस तरह की किसी स्कीम की घोषणा की जाती है तो राज्य सरकार के बजट में प्रावधान उसके सबंध में प्रावधान किए जाते हैं लेकिन महाराष्ट्र सरकार के बजट में इस स्कीम से संबधित कोई भी प्रावधान साफतौर पर नहीं है. इतना ही नहीं शरद पवार ने अपने बयान में यह भी कहा था कि यह स्कीम केवल एक चुनावी अभियान मात्र है जोकि महिलाओं के साथ एक तरह से धोखा है. वहीं शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी इस स्कीम पर कई तरह के सवाल उठाए है .

मराठा आरक्षण का मुद्दा

महाराष्ट्र की राजनीति में मराठा समुदाय का महत्व सबसे ज्यादा है,राज्य के अब तक के 20 मुख्यमंत्रियों में से 11 मुख्यमंत्री मराठा समुदाय से ही रहे है और 1962 से ही राज्य की विधानसभा में मराठाओं का प्रतिनिधित्व 60% से भी ज्यादा रहा है . पिछले कुछ समय से राज्य में मराठा समुदाय द्वारा आरक्षण की मांग काफी तेज हो गई है जिसके सबसे प्रमुख नेता मनोज जरांगे है, जरांगे की मांग है कि सभी मराठाओं को कुनबी जाति का प्रमाण पत्र जारी किया जाए जिससे की मराठा समुदाय ओबीसी आरक्षण का लाभ उठा सके लेकिन महाराष्ट्र का ओबीसी समाज इसका पुरजोर विरोध कर रहा है जिस वजह से मराठाओं और ओबीसी समुदाय के बीच संघर्ष की स्थिती उत्पन्न हो रही है .राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव में मराठा आरक्षण एक प्रमुख मुद्दा होगा जिसे दोनों ही गठबंधन अपने-अपने तरीके से साधने की पुरजोर कोशिश करेगें .

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