Who Was Sambhaji: महाराष्ट्र के एक प्रमुख शहर औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर (Sambhajinagar) किए जाने की चर्चा चल रही है. इस मुद्दे पर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है. इस बीच संभाजी भोषले (Sambhaji Bhosale) के नाम को खूब सर्च किया जा रहा है. आखिर कौन थे संभाजी, जिनके नाम पर इस शहर के नामकरण की तैयारी है. इसी शहर में मुगल शासक औरंगजेब की बेगम का प्रसिद्ध मकबरा (BIbi ka Maqbara) है.Also Read - Maharashtra Violence: हिंसा भड़कने से रोकने के लिए एडीजी रैंक के 4 सीनियर IPS अफसरों को विभिन्न शहरों में भेजा गया

दरअसल, संभाजी मराठा सम्राज्य के दूसरे शासक और शिवाजी के पुत्र थे. वह शिवाजी के सबसे बड़े पुत्र थे और वह पिता की मौत के बाद करीब नौ सालों तक मराठा सम्राज्य के राजा थे. उनका जीवन काल 14 मई 1657 से मार्च 1689 रहा. शिवाजी और उनके पुत्र का अधिकतर जीवनकाल मुगल शासकों के साथ युद्ध के लिए याद किया जाता है. Also Read - महाराष्ट्र के इस जिले में बसों और पेट्रोल पंपों पर जांचे जाएंगे कोविड वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट, जारी हुआ आदेश

1689 में मुगलों के साथ हुए एक युद्ध में संभाजी को बंदी बना लिया गया और बंदी गृह में ही उनकी मौत हो गई. ऐसा माना जाता है कि औरंगाबाद शहर का नाम मुगल शासक औरंगजेब के नाम पर रखा गया है. औरंगजेब की कैद में ही संभाजी की मौत हुई थी. Also Read - नवाब मलिक ने फिर समीर वानखेड़े पर हमला बोला- जब से NCB में आए हैं, वे पहले ही दिन से फिल्म इंडस्‍ट्री को टारगेट कर रहे

इस बीच महाराष्ट्र के भाजपा प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने सोमवार को कहा कि औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर किए जाने का फैसला ‘सबको स्वीकार्य’ है और अगर उनकी पार्टी यहां नगर निगम में सत्ता में आती है तो वह इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित करेगी. पाटिल ने शिवसेना के रुख की भी निंदा की जो कई वर्षों से नाम परिवर्तन की समर्थक रही है, लेकिन अब वह इसका लगातार विरोध कर रही कांग्रेस के साथ सत्ता में है.

पाटिल ने पत्रकारों से कहा, ‘‘संभाजीनगर नाम सभी को स्वीकार्य है. फिर हम नाम क्यों नहीं बदलते हैं? मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि औरंगाबाद (नगर निगम) में सत्ता में आने पर हमलोग नाम परिवर्तन के पक्ष में एक प्रस्ताव पारित करेंगे.’’

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस ने इसका विरोध किया है. लेकिन शिवसेना को अपनी सरकार चलाने के लिए कांग्रेस के सहयोग की जरूरत है. शिवसेना को निश्चित रूप से यह फैसला करना होगा कि क्या वह इस मुद्दे पर सरकार में बनी रहेगी.’’

शिवसेना ने करीब दो दशक पहले औरंगाबाद का नाम बदलकर इसे संभाजीनगर करने की मांग की थी और इस संबंध में जून 1995 में औरंगाबाद नगर निगम में एक प्रस्ताव पारित किया गया था जिसे बाद में कांग्रेस के एक पार्षद ने उच्च न्यायालय और फिर उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी.