मुंबई: चीन में जानलेवा विषाणुओं के अक्सर उत्पन्न होने का दावा करते हुए शिवसेना ने शुक्रवार को कहा कि विशव भर के देशों को यह पता लगाना चाहिए कि क्या नोवेल कोरोना वायरस जैसे रोगजनक विषाणु जैविक हथियारों के उत्पादन का प्रयास करने से उत्पन्न हो रहे हैं?

कोरोना वायरस इस महीने की शुरूआत में चीन के वुहान शहर से फैलना शुरू हुआ. इस महामारी से अब तक करीब 200 लोगों की मौत हो चुकी है और दुनिया भर में लगभग 9000 से अधिक लोग इससे संक्रमित हैं. बता दें कि महाराष्ट्र में कम से कम 12 लोगों की जांच की गई, लेकिन अभी तक संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है.

शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा कि अमेरिका और जापान सहित कई विकसित देश इस नए वायरस का मुकाबला कर रहे हैं.इसमें यह भी कहा गया, लेकिन यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि इस तरह के जानलेवा वायरस हमेशा चीन में ही कैसे पैदा होते हैं? चीन में एक जैविक प्रयोगशाला है, जहां कोरोनो वायरस पाया गया था.

पार्टी ने कहा, ‘‘वहां विभिन्न जानवरों पर प्रयोग किए जाते हैं. विश्व समुदाय को यह भी पता लगाना चाहिए कि क्या ऐसे वायरस भविष्य में सामूहिक विनाश के जैविक हथियार बनाने के प्रयासों का परिणाम हैं.

कोरोना वायरस के दुनियाभर में सात हजार से अधिक लोग इसकी चपेट में है. इनमें 80 से ज्‍यादा लोग चीन, मकाऊ और हांगकांग से बाहर के हैं. लगभग 15 देशों में इस वायरस के मामले सामने आए हैं.

‘एयर एशिया’ एयरलाइन ने कहा है कि उसने मलेशिया के कोता किनाबालू, थाईलैंड के बैंकॉक और फुकेत से चीन के वुहान जाने वाली उड़ानों पर लगे प्रतिबंध को फरवरी के अंत तक बढ़ा दिया है. ‘एयर ऑस्ट्रल’ एयरलाइन ने ला रियूनियन से ग्वांग्झू के बीच उड़ानों पर आठ फरवरी से एक मार्च तक रोक लगाने का फैसला किया है.

24 जनवरी को वुहान को जाने वाली अपनी तीन साप्ताहिक उड़ानें निलंबित कर चुकी एयर लाइन ‘एयर फ्रांस’ ने गुरुवार को कहा कि उसने 9 फरवरी तक बीजिंग और शंघाई को जाने वाली अपनी नियमित उड़ानों पर पाबंदी लगा दी है.