मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि उनकी सरकार कोरेगांव-भीमा हिंसा मामले की जांच केंद्र को नहीं सौंपेगी. बता दें कि पुणे के शनिवारबाड़ा में 31 दिसंबर 2017 को आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में कथित तौर पर दिए गए भड़काऊ भाषण के परिणामस्वरूप हिंसा भड़की थी. Also Read - Corona Crisis: PM Modi ने कोविड-19 की स्थिति पर महाराष्ट्र और तमिलनाडु के CM से की बात

महाराष्ट्र सरकार ने हाल में एल्गार परिषद मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपने की मंजूरी दी थी.
ठाकरे ने कहा, ”एल्गार और कोरेगांव-भीमा दो अलग विषय हैं. मेरे दलित भाइयों से जुड़ा मुद्दा कोरेगांव-भीमा का है और इसे मैं केंद्र को नहीं सौंपूंगा. मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि दलित भाइयों के साथ कोई अन्याय नहीं होगा.” Also Read - पश्चिम बंगाल चुनाव: शरद पवार और महबूबा मुफ़्ती ने ममता बनर्जी को दी बधाई, कही ये बात

एल्गार परिषद की जांच एनआईए को सौंपने के ठाकरे के फैसले पर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने हाल में सार्वजनिक तौर पर नाखुशी जाहिर की थी. माओवादियों से कथित संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार किए गए मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मामले की पड़ताल विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपे जाने की पहले ही मांग कर चुके शरद पवार ने कहा कि केंद्र सरकार को जांच एनआईए को सौंपने से पहले राज्य सरकार को भरोसे में लेना चाहिए था. Also Read - Covid-19 महामारी के बीच आज सादगी से मनाया जा रहा महाराष्ट्र दिवस, कल आए थे 62,919 नए केस

ये मामला पुणे के शनिवारवाड़ा में 31 दिसंबर 2017 को एल्गार परिषद संगोष्ठी में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने से जुड़ा है. पुलिस ने दावा किया था कि इन भाषणों के चलते ही अगले दिन जिले के कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा हुई थी. पुलिस ने दावा किया था कि संगोष्ठी के आयोजन को माओवादियों का समर्थन था. जांच के दौरान पुलिस ने वामपंथी झुकाव वाले कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था.