नई दिल्ली: वीर सावरकर को लेकर कांग्रेस और शिवसेना के बीच हालिया बयानबाजी की पृष्ठभूमि में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने शुक्रवार को कहा कि वीर सावरकर के अंग्रेजों से माफी मांगने की बात मिटाई नहीं जा सकती और अगर नरेंद्र मोदी सरकार उन्हें ‘भारत रत्न’ देती है, तो हम उसका विरोध करेंगे. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ‘जटिल और विवादित व्यक्तित्व’ सावरकर के बारे में कुछ अच्छी और कुछ खराब बातें दोनों थीं, लेकिन कांग्रेस के लोगों को जो बात खराब लगती है, वह उसी के बारे में बात करेंगे. Also Read - जम्मू में जुटे ‘ग्रुप ऑफ 23’ के नेता, कांग्रेस बोली- चुनावी राज्यों में प्रचार कर अपनी पार्टी के प्रति निष्ठा दिखाएं

बता दें कि शिवसेना संसद में कई बार यह मांग भी उठा चुकी है कि वीर सावरकर को भारत रत्न दिया जाना चाहिए. Also Read - West Bengal Assembly Elections 2021 Opinion Poll: बंगाल में फिर एक बार ममता सरकार! लेकिन 3 से 100 पर पहुंच सकती है भाजपा; जानिए क्या है जनता का मूड

राहुल गांधी के बयान को लेकर शिवसेना-कांग्रेस में कड़वाहट
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने यह टिप्पणी उस वक्त की है जब महाराष्ट्र में कुछ हफ्ते पहले शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाने वाली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के बयान और सेवा दल की एक पुस्तिका को लेकर दोनों पार्टियों के बीच कड़वाहट पैदा हो गई थी. Also Read - India vs England ODI Series: भारत बनाम इंग्लैंड वनडे सीरीज में नहीं होंगे दर्शक, जानिए क्या है वजह

राहुल गांधी ने कहा था- मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं
राहुल गांधी ने बलात्कार से जुड़ी अपनी एक टिप्पणी के भाजपा के विरोध का हवाला देते हुए 14 दिसंबर को रामलीला मैदान की एक रैली में कहा था कि ‘मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं, राहुल गांधी है. मैं कभी माफी नहीं मांगने वाला हूं.’’

वीर सावरकर और नाथूराम गोडसे के कथित रिश्‍तों के दावे पर हुआ था विवाद 
मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सेवा दल की एक पुस्तिका में वीर सावरकर और महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के बीच के कथित रिश्तों का उल्लेख किया गया था, जिसको लेकर विवाद खड़ा हो गया था. इसको लेकर शिवसेना ने कड़ी आपत्ति जताई थी.

अंग्रेजों ने सावरकर को 60 रुपए की पेंशन दी थी
सावरकर को लेकर कांग्रेस और शिवसेना के बीच बयानबाजी के बारे में पूछे जाने पर चव्हाण ने दिए इंटरव्‍यू में कहा, ‘‘सावरकर एक जटिल और विवादित व्यक्तित्व थे. उनके बारे में इतिहास की काफी जानकारी सामने आई है. वह जेल में थे, यह बात सही है. लेकिन यह भी सही है कि सावरकर ने माफी मांगी थी. वह एक तरह से अंग्रेजों के साथ मिलकर काम कर रहे थे, जिसके चलते अंग्रेजों ने उन्हें 60 रुपए की पेंशन दी थी.

कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं ने फांसी के फंदे को चूम लिया था
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा, ” मुझे लगता है कि इतिहास के किसी भी व्यक्ति का ब्लैक एंड व्हाइट विश्लेषण नहीं हो सकता. किसी कांग्रेसजन को पूछिए तो हमारे दिल में यही बात है कि कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं ने जान की बाजी लगा दी थी और फांसी के फंदे को चूम लिया था.’’

माफीनामे की बात तो मिटाई नहीं जा सकती
यह पूछे जाने पर कि क्या सावरकर को लेकर कांग्रेस के विचार वही हैं जो शिवसेना से हाथ मिलाने से पहले थे तो चव्हाण ने कहा, ‘‘विचार की बात नहीं है, यह तथ्य है. यह भी सही है कि सावरकर ने इतिहास लिखा था और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को उसमें जगह दी थी. इतिहास में उनका महत्वपूर्ण योगदान है. लेकिन उनके माफीनामे की बात तो मिटाई नहीं जा सकती.’’

भारत रत्न देना तो मोदी सरकार का काम है
शिवसेना की सावरकर के लिए भारत रत्न की मांग पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा, ”केंद्र सरकार जिसको चाहे उसे भारत रत्न दे सकती है, अगर उनकी विचारधारा भाजपा से मेल खाती है. यह भी है कि महात्मा गांधी की हत्या में संदेह पैदा हुआ था कि सावरकर शामिल थे या नहीं. कोई अंतिम बात नहीं की गई थी. कपूर आयोग ने शक की सुई की बात कही थी. भारत रत्न देना तो मोदी सरकार का काम है. वो ऐसा करेंगे तो हम उसका विरोध करेंगे. इसमें कोई विवाद की बात नहीं है.”

भाजपा ने एक लक्ष्मण रेखा पार की है
पूर्व सीएम चव्हाण ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में सीएए, एनआरसी और एनपीआर लागू नहीं किया जाएगा, क्योंकि केंद्र सरकार ने संशोधित नागरिकता कानून में धर्म का पहलू शामिल कर दिया है. सीएए और एनआरसी विरोधी प्रदर्शनों के संदर्भ में उन्होंने कहा,” यह पहली बार है कि भाजपा ने एक लक्ष्मण रेखा पार की है.

कानून में मुस्लिम समाज को अलग रखने का हम घोर विरोध करते हैं
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा, संविधान के तहत कानून बनाते समय धर्म का उपयोग नहीं होता है.” धर्मनिरपेक्ष देश में सबको समान अधिकार दिया जाता है. इस कानून में मुस्लिम समाज को जिस तरह से अलग रखा गया है उसका हम घोर विरोध करते हैं. समाज के दूसरे वर्गों के लोग भी इस आंदोलन में शामिल हैं.” उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस आंदोलन कर रही है और देश में कई कार्यक्रम किए जा रहे हैं.

महाराष्ट्र में सीएए, एनआरसी और एनपीआर लागू नहीं होगा
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ”मुझे नहीं लगता है कि महाराष्ट्र में सीएए, एनआरसी और एनपीआर लागू होगा. सीएए में धर्म का पहलू है, इसलिए हम विरोध करते हैं. हम कहते हैं कि एनपीआर रोक दो.”