नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस के दिन किसान प्रदर्शन के नाम पर राजधानी दिल्ली में जो हिंसात्मक प्रदर्शन देखने को मिला पूरा देस उसका गवाह है. यही कारण है कि कुछ लोगों द्वारा की गई हिंसा को पक्ष हो या विपक्ष सभी एक सिरे से नकार रहे हैं. लेकिन इसका खामियाजा किसान आंदोलन को भुगतना पड़ सकता है. Also Read - Kisan Andolan: आंदोलन तेज करेंगे किसान- SKM का ऐलान, चुनावी राज्यों में BJP का करेंगे विरोध और 12 मार्च को...

दरअसल किसानों द्वारा 1 फरवरी को यानी जिस दिन संसद में बजट पेश किया जाना है. उस दिन किसानों ने संसद मार्च का ऐलान किया था. लेकिन बीते कल हिए हिंसात्मक प्रदर्शन के बाद आशंका जताई जा रही है कि इस रद्द किया जा सकता है. बुधवार के दिन हो रही किसान बैठक में इसपर फैसला लिया जा सकता है. Also Read - BJP MP नंद कुमार सिंह चौहान का COVID-19 के संक्रमण के चलते मेदांता अस्‍पताल में निधन

इससे पहले किसान संगठनों द्वारा ही तय किया गया था कि 1 फरवरी के दिन किसान पैदल संसद मार्च निकालेंगे. लेकिन गणतंत्र दिवस के दिन हुई हिंसा, तोड़फोड़ और लाल किले पर किसान संगठनों और निशान साहिब के झंडे को लगाने के बाद विवाद बढ़ चुका है. इस मामले में अब गृह मंत्रालय ने सख्ती दिखाते हुए मामले की जांच को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है और हुड़दंगियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा चुकी है. Also Read - अरविंद केजरीवाल ने कहा- किसानों के लिए डेथ वारंट हैं कृषि कानून, लाल किले पर बीजेपी ने कराई थी हिंसा

दिल्ली पुलिस की मानें तो करीब 300 पुलिसकर्मी हिंसात्मक प्रदर्शन में घायल हुए हैं. वहीं अबतक दिल्ली के अलग अलग थानों में 22 मामले दर्ज हो चुके हैं. जबकि लगभग 200 लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.