नई दिल्ली : शुक्रवार को दिल्ली की एक विशेष अदालत ने गोंडवाना इस्पात लिमिटेड और उसके निदेशक को महाराष्ट्र में एक कोयला ब्लॉक का आवंटन अपने पक्ष में कराने के लिए धोखाधड़ी करने और आपराधिक षड्यंत्र रचने के मामले में दोषी करार दिया. कंपनी ने माजरा कोल ब्लॉक आवंटन हथियाने के लिए झूठे दस्तावेज प्रस्तुत किए थे जिस पर 2014 में कंपनी और कंपनी के डायरेक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज़ की गई थी Also Read - तेजस्‍वी ने अपने खिलाफ CBI जांच के लिए सीएम नी‍तीश कुमार पत्र लिखा, मुझे अरेस्‍ट भी कर सकते हैं

कंपनी के निदेशक अशोक डागा को हिरासत में लेने का आदेश
कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई करने के लिए विशेष रूप से नियुक्त सीबीआई के विशेष न्यायाधीश भारत पराशर ने कंपनी के निदेशक अशोक डागा को हिरासत में लेने का आदेश दिया. इससे पहले महाराष्ट्र में कंपनी को आवंटित किये गये माजरा कोयला ब्लॉक के लिए गलत तथ्य पेश करने के लिए इसे और इसके निदेशक अशोक डागा को समन जारी किया गया था. अशोक डागा और कंपनी को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120- बी ( आपराधिक षड्यंत्र ) और 420 ( धोखाधड़ी ) के तहत दोषी पाया गया और भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420 के तहत मूल अपराध का भी दोषी पाया गया. कंपनी को 2003 में माजरा कोयला ब्लॉक आवंटित किया गया था और उसके खिलाफ 2014 में एफआईआर दर्ज की गई थी.
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