
Avinash Rai
पॉलिटिकल और अंतरराष्ट्रीय खबरों से अविनाश राय को खासा लगाव है. अविनाश फिलहाल इंडिया.कॉम हिंदी के जनरल डेस्क पर कार्यरत हैं. इनके पास मीडिया में काम करने का 4 साल ... और पढ़ें
Mucormycosis/Black Fungus Cases: देश में एक तरफ कोरोना महामारी फैली हुई है लेकिन इस बीच एक नई बीमारी पैदा हो चुकी है. देश के कई हिस्सों से ब्लैक फंगस (Black Fungus) के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. ऐसे में महाराष्ट्र व राजधानी दिल्ली में ब्लैक फंगस के मामले देखने को मिल रहे हैं. इस बीच ब्लैक फंगस के मामले बढ़ने के साथ ही इस संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवा में कमी आ गई है. दिल्ली के अस्पतालों की मानें तो कोरोना से संक्रमित लगभग 185 लोगों में ब्लैक फंगस के मामले की पुष्टि की गई है. बता दें कि ब्लैक फंगस के इन 185 मरीजों के दिल्ली के कुल 7 अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक दिल्ली स्थित AIIMS में 61 ब्लैक फंगस के मरीजों का इलाज जारी था. वहीं गंगाराम अस्पताल में 69 लोगों ब्लैक फंगस से संक्रमित थे जिनका इलाज किया जा रहा था. बता दें कि ब्लैक फंगस के ज्यादातर मामले उन लोगों में देखने को मिले जिनका शुगर लेवल कंट्रोल में नहीं था या फिर जिन्हें स्टेरॉयड, टोंसीलिजुमैब के इंजेक्शन दिए गए हैं तथा जिनका इम्यूनिटी कमजोर है.
ब्लैक फंगस के मामलों में डॉक्टर का कहना है कि अगर ब्लैक फंगस से संक्रमित मरीज का अगर इलाज न किया जाए तो 80 प्रतिशत मरीजों को इस मामले में मौत हो जाती है. बता दें कि ब्लैग फंगस का सही समय पर पता नहीं चलता है तो यह आंख और मुंह को बुरी तरह प्रभावित करता है. इस कारण मरीज की आंख की रोशनी या जबड़े को वे खो सकते हैं.
ब्लैक फंगस के आंकड़े
डॉक्टर्स की मानें तो नवंबर महीने में ब्लैक फंगस के मामलों में थोड़ी उछाल देखी गई थी. लेकिन दिसंबर के दो सप्ताह में 10 मामले दर्ज हुए. 7-8 मई के बीच करीब 100 ब्लैक फंगस के मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया. अगर अस्पतालों के हिसाब से माने तो मैक्स में 25, इंद्रप्रस्थ में 15, मणिपाल अस्पताल में 10, फोर्टिस में लगभग 3, लोक नायक अस्पताल में 1मामले दर्ज किए गए हैं.
ब्लैक फंगस का इलाज
ब्लैक फंगस के इलाज में केवल एम्फोटेरिसिन बी दवा ही काम आती है. इसके अलावा किसी अन्य दवा से इसका फिलहाल के लिए इलाज संभव नहीं है. ऐसे में इस दवा की मांग अचानक से बढ़ी है. इस दवा की कालाबाजारी न हो इसके लिए सरकार द्वारा 4 सदस्यीय कमेटी बनाई गई है जो इस दिशा में काम करेगी.
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