नई दिल्ली: प्रधानमंत्री कार्यालय ने रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन द्वारा एनपीए की सौंपी गई सूची की जानकारी मांगने वाले एक आरटीआई आवेदन को ‘घुमंतू पूछताछ’ करार दिया है. सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय से राजन द्वारा एनपीए की सौंपी गयी सूची की जानकारी मांगी गई है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि आवेदन के तहत पूछे गये सवाल आरटीआई अधिनियम के तहत परिभाषित ‘सूचना’ के दायरे में नहीं आते हैं. Also Read - पीएम केयर फंड से प्रवासी मजदूरों को दिए जाएंगे एक हज़ार करोड़ रुपए, PMO का ऐलान

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प्रधानमंत्री कार्यालय में अवर सचिव प्रवीण कुमार ने कहा कि ‘मांगी गई सूचना दिशाहीन हैं और आरटीआई अधिनियम 2005 की धारा दो(एफ) के तहत सूचना की परिभाषा के दायरे में नहीं है.’ आवेदनकर्ता ने राजन द्वारा सौंपी गई सूची, पीएमओ द्वारा इस सूची पर उठाए गए कदम और उस प्राधिकरण की जानकारी मांगी थी जिसे यह भेजे गए थे. प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह भी बताने से मना कर दिया कि राजन ने यह सूची कब दी थी. Also Read - COVID-19: देशभर में बीएसएफ के 115 जवान करोना संक्रमित, मुख्यालय ने दी जानकारी

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रघुराम राजन ने आकलन समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी को सार्वजनिक बैंकिंग प्रणाली में बढ़ती धोखाधड़ी की जानकारी दी थी. उन्होंने कहा था कि रिजर्व बैंक ने जांच एजेंसियों के साथ शीघ्रता से जानकारियां साझा करने के लिए मेरे कार्यकाल के दौरान धोखाधड़ी निगरानी सेल गठित की थी. मैंने प्रधानमंत्री कार्यालय को हाईप्रोफाइल मामलों की सूची भी सौंपी थी और कहा था कि हम एक या दो को वापस लाने पर समन्वय कर सकते हैं. मैं इस मामले में उठाए गए कदम से अवगत नहीं हूं. यह ऐसा मामला है जिसे त्वरित समाधान की जरूरत है.’