नई दिल्ली: जाने-माने इतिहासकार एवं जामिया मिलिया इस्लामिया के पूर्व कुलपति मुशीरुल हसन का सोमवार सुबह निधन हो गया. वह तकरीबन 70 साल के थे और चार वर्ष पहले हुए एक सड़क हादसे के बाद सेहत संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे. हसन को कल रात यहां के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. उन्होंने तड़के चार बजे अंतिम सांस ली. उनके पूर्व सचिव जफर नवाज हाशमी ने बताया, ‘दो वर्ष पहले हुए एक सड़क हादसे के बाद से वह बिस्तर पर ही थे. किडनी संबंधी समस्याओं के कारण उनका डायलिसिस किया जा रहा था.’ Also Read - Jamia Violence: दिल्ली पुलिस ने 10 छात्रों को नोटिस दिए, कहा- पूछताछ में मौजूद रहो

उन्होंने बताया, ‘सेहत संबंधी कुछ जटिलताओं की वजह से उन्हें आधी रात को अस्पताल ले जाया गया जहां आज सुबह उनका निधन हो गया.’ उनके पारिवारिक सूत्र ने बताया कि उनका नमाज-ए-जनाजा एक बजे बाबुल इल्म में और दो बजे जामिया मस्जिद में होगा. यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ने बताया, ‘उन्हें परिसर में बने कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा.’ माकपा महासचिव सीताराम येचुरी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया. Also Read - दिल्लीः जामिया यूनिवर्सिटी के गेट नंबर 5 के पास देर रात हुई फायरिंग, लाल रंग की स्कूटी पर आए थे संदिग्ध

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उन्हें विभाजन तथा दक्षिण एशिया में इस्लाम के इतिहास को लेकर किए गए उनके काम के लिए जाना जाता है. वह वर्ष 2004 से 2009 तक जामिया मिलिया इस्लामिया में कुलपति रहे. वह भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार के महानिदेशक, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज के उपाध्यक्ष तथा इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने हसन के निधन को अकादमिक क्षेत्र के लिए बहुत बड़ी क्षति बताया.