नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस के अवसर पर ट्रैक्टर रैली के नाम पर दिल्ली में पुलिस व सुरक्षाबलों के खिलाफ हिंसा की गई. इस दौरान लाल किले पर धार्मिक झंडे को भी फहराया गया. इसके बाद से ही दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को पंजाबी अभिनेता दीप सिद्धू की तलाश थी लेकिन वह पुलिस को कई दिनों तक चकमा देता रहा इसके बाद जब वह हिरासत में आया तो उसने कई बातों से पर्दा हटाया. दीप सिद्धू ने इतने दिनों तक छिपे रहने को लेकर खुलासा किया कि वह इसलिए छिप रहा था क्योंकि उसकी जान पर खतरा था, उसे डर था कि उसे मार दिया जाएगा. क्योंकि किसान नेताओं द्वारा सारा दोष उसी के सिर मढ़ दिया गया है.Also Read - मुस्लिम महिलाओं के प्रति अश्लील टिप्पणी का केस: Club House पर बिसमिल्लाह नाम से प्रोफाइल बनाए था आरोपी, पकड़ा गया

पुलिस अफसरों से सिद्धू ने यह भी कहा कि लाल किला और आईटीओ के लिए निकला ट्रैक्टर मार्च स्पॉन्टेनियस (स्वत:) नहीं था. सिद्धू ने बताया कि गणतंत्र दिवस की रैली से पहले पंजाब में और सिंघु सीमा पर किसान नेता किसानों को यह बता रहे थे कि वे नई दिल्ली, संसद और इंडिया गेट, लाल किले तक रैली निकालेंगे. गौरतलब है कि लंबे समय से पुलिस को दीप सिद्धू की तलाश थी जिसे मंगलवार के दिन पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. Also Read - Bulli Bai App Case: बुल्ली बाई एप के आरोपी सु्ल्ली डील एप में भी थे शामिल, मुंबई पुलिस ने कोर्ट को दी ये जानकारी

पुलिस का इस बाबत कहना है कि दीप सिद्धू ने जो बी आरोप लगाए है उसका सत्यापन किया जाएगा. जबकि किसान नेताओं का कहना है कि जबतक वे दीप सिद्धू के बयान को सुनते और पढ़ते नहीं तब तक वे इस मामले पर किसी प्रकार की टिप्पणी नहीं करेंगे. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ में दीप सिद्धू ने बताया कि उसका इरादा बुरा नहीं था. जिन रास्तों पर सभी ट्रैक्टर मार्च निकाल रहे थे, वह भी उन रास्तों पर सबके साथ जाता गया. सिद्धू ने यह भी बताया कि वह 25 जनवरी को सिंघु बॉर्डर पर नहीं था. Also Read - गाजीपुर में IED मिलने का मामला: टेलीग्राम पर अलकायदा से जुड़े संगठन ने ली जिम्मेदारी, दिल्ली पुलिस जांच में जुटी

दीप सिंह सिद्धू ने पुलिस ने जब इस बाबत सबूत दिखाए तो उसने बताया कि वह किसान प्रदर्शन स्थल पर था लेकिन थोड़ी दूर पर वह सोया था. सुबह 26 जनवरी के दिन जब वह जगा तब उसके फोन पर लोगों के लालकिले की और बढ़ने के बारे में तीन मिस्ड कॉल और संदेश थे. इसके बाद वह भी लोगों के साथ उन रास्तों पर चला गया और लाल किला पहुंचा. उसने बताया कि हिंसा की घटना के बाद वह गाड़ी से वहां से निकल गया था.