नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने यूपी सरकार को ताज महल के संरक्षण पर अपना दृष्टि पत्र दाखिल करने के लिए दी गई अवधि 15 नवंबर तक के लिए बढ़ा दी है. उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यायालय को बताया कि समूचे आगरा को ‘धरोहर शहर’ घोषित करना मुश्किल होगा. सुप्रीम कोर्ट में ताज महल के संरक्षण को लेकर मामला चल रहा है.Also Read - SC On Farmers Protest: सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी- किसानों को प्रदर्शन का हक, लेकिन सड़के नहीं कर सकते बंद

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शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि ताजमहल के इर्द-गिर्द के कुछ इलाकों को विरासत घोषित करने के बारे में वह विचार करे. उत्तर प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि अहमदाबाद स्थित पर्यावरण नियोजन एवं प्रौद्योगिकी केंद्र (सीईपीटी) ताजमहल के आसपास के इलाके को धरोहर घोषित करने में हमारी मदद कर रहा है.

सुप्रीम कोर्ट की सरकार को फटकार, ताजमहल को सुरक्षित नहीं रख सकते तो उसको तोड़ दो

बता दें कि ताजमहल के संरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. ताजमहल के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट कई बार यूपी सरकार को फटकार लगा चुका है. सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर ताजमहल को संरक्षित नहीं कर सकते तो उसे गिरा ही दिया जाए. अदालत ने कहा था कि ताजमहल एफिल टॉवर से ज्यादा सुंदर है और यह देश की विदेशी मुद्रा की समस्या को हल कर सकता है. अदालत ने कहा था कि “एफिल टॉवर को आठ करोड़ लोग देखने जाते हैं, जो कि टीवी के एक टॉवर जैसा दिखता है. हमारा ताजमहल बहुत ज्यादा खूबसूरत है. यदि आप इसकी देखभाल करेंगे तो इससे आपकी विदेशी मुद्रा की समस्या हल होगी.” खंडपीठ ने कहा, “क्या आपको इस बात का अहसास है कि आपकी लापरवाही से देश को किनता नुकसान हुआ है?”