नई दिल्ली: विपक्षी पार्टियों ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को पद से हटाए जाने के लिए भाजपा सरकार की निंदा की है. वर्मा और सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच टकराव चल रहा है और केंद्र ने दोनों ही अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया है. कांग्रेस ने वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने को एजेंसी की स्वतंत्रता खत्म करने की अंतिम कवायद बताया है जबकि माकपा ने सरकार के इस फैसले को गैरकानूनी करार दिया. वहीं, आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार से सीबीआई निदेशक को छुट्टी पर भेजे जाने के पीछे की वजह की बताने को कहा है. Also Read - WB Assembly elections 2021: कांग्रेस पार्टी को बंगाल में बड़ा झटका, उम्मीदवार रेजाउल हक की कोरोना से मौत

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कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने हैरत जाहिर करते हुए सवाल किया कि क्या वर्मा को, राफेल घोटाले में भ्रष्टाचार की जांच करने की उत्सुकता की वजह से ‘हटाया’ गया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस संबंध में जवाब भी मांगा. सुरजेवाला ने एक ट्वीट में कहा, ‘मोदी सरकार ने सीबीआई की स्वतंत्रता को खत्म करने की ‘आखिरी कवायद’ की. सुनियोजित तरीके से सीबीआई को खत्म करने और उसे बदनाम करने की कोशिश पूरी हो गई. प्रधानमंत्री ने यह सुनिश्चित किया कि प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई की ईमानदारी, विश्वसनीयता खत्म हो जाए.’

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हालांकि इन आरोपों पर सरकार या सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई है. कांग्रेस नेता ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री मोदी ने सीबीआई को बर्बाद कर अपना कुख्यात ‘मोदी मेड गुजरात मॉडल’ का असली रंग दिखाया है. क्या सीबीआई निदेशक को राफेल घोटाले की जांच की उत्सुकता की वजह से हटाया गया है? क्या यह एक घटिया लीपापोती है? प्रधानमंत्री जवाब दें.’ माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने वर्मा को पद से ‘हटाए’ जाने को ‘गैरकानूनी’ करार दिया. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा चुने गए अधिकारी पर लगे गंभीर आरोप के बाद उसे जांच से बचाने के लिए ऐसा किया गया है. इससे, विशेष निदेशक के शीर्ष भाजपा नेतृत्व के साथ सीधे संबंध को बचाने के लिए गंभीर कवरअप का संकेत मिलता है.

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वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप नेता अरविंद केजरीवाल ने अपने ट्वीट में कहा, ‘सीबीआई निदेशक को छुट्टी पर भेजने के पीछे की वजह क्या है? लोकपाल अधिनियम के तहत नियुक्त किए गए एक जांच एजेंसी के प्रमुख के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार मोदी सरकार को किस कानून के तहत मिला. मोदी क्या छिपाने की कोशिश कर रहे हैं?’ सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने वर्मा और अस्थाना के बीच चल रहे विवाद के बाद दोनों अधिकारियों से उनके अधिकार वापस ले लिए और उन्हें छुट्टी पर भेज दिया है. जांच एजेंसी के इतिहास में इसे अपनी तरह का पहला मामला बताया जा रहा है. एक सरकारी आदेश के मुताबिक, प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली नियुक्ति समिति ने मंगलवार की रात, एजेंसी के निदेशक का प्रभार संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को तत्काल प्रभाव से सौंप दिया.