नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने भारत में रोहिंग्या शरणार्थियों को कथित रूप से अवैध प्रवास में मदद कर रहे दर्जन भर संदिग्ध गैरसरकारी स्वयंसेवी संगठनों (एनजीओ) और व्यक्तियों को चिन्हित किया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत ऐसे संगठनों की सूची तैयार कर इनकी गतिविधियों पर निगरानी तेज कर दी है. मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, चिन्हित किए गए अधिकांश संगठन दिल्ली से संचालित हैं. इन पर सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से अवैध रोहिंग्या प्रवासियों को भारत में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी का दर्जा दिलाने सहित अन्य दस्तावेजी सबूत मुहैया कराकर शरणार्थी का दर्जा दिलाने में मदद करने का आरोप है.

हाल ही में दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा ने इन संगठनों की कथित संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर केन्द्र और दिल्ली सरकार के गृह विभाग को इस बारे में सूचित किया था. गृह विभाग ने दिल्ली पुलिस द्वारा मुहैया कराई गई सूचनाओं के आधार पर रोहिंग्या शरणार्थियों की अवांछित मदद करने वाले संगठनों और व्यक्तियों की जांच के आधार पर तैयार सूची केंद्र सरकार को सौंपी है. इसमें चिन्हित संगठनों के उन पदाधिकारियों की भी जानकारी दी गई है जो अवैध रोहिंग्या शरणार्थियों की कथित तौर पर अवांछित मदद कर रहे हैं.

छत्तीसगढ़: पीएम मोदी ने कहा- देश का नौजवान रोजगार देने की ताकत के साथ है

इस सूची में अंतरराष्ट्रीय सामाजिक संगठन एमनेस्टी की भारत इकाई में कार्यरत एक वरिष्ठ अधिकारी के अलावा पश्चिम बंगाल के कोलकाता से संचालित एनजीओ ‘बोंदि मुक्ति कमेटी’ सहित दस अन्य एनजीओ शामिल हैं. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग के साथ मिलकर शरणार्थी कल्याण के क्षेत्र में कार्यरत दो कथित एनजीओ के कुछ पदाधिकारी भी निगरानी के दायरे में आए है. सूची में भारतीय विदेश सेवा के एक सेवानिवृत्त अधिकारी और दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर का भी नाम कथित तौर पर शामिल है.