दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में कांग्रेस ने भले ही एक भी सीट न जीती हो, लेकिन उसने आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दीं. 12 अहम सीटों पर कांग्रेस के वोटों ने बीजेपी को जीत दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई. इन सीटों पर बीजेपी की जीत का अंतर कांग्रेस के वोटों से भी कम था, जिससे साफ हुआ कि कांग्रेस ने AAP को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाया. खासकर, नई दिल्ली, जंगपुरा और ग्रेटर कैलाश जैसी सीटों पर कांग्रेस के वोट शेयर ने AAP की हार को तय कर दिया.
नई दिल्ली सीट पर सबसे बड़ा उलटफेर तब हुआ जब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बीजेपी के प्रवेश वर्मा ने 4,089 वोटों से हरा दिया. दिलचस्प बात यह रही कि कांग्रेस उम्मीदवार संदीप दीक्षित को 4,568 वोट मिले, जो बीजेपी की जीत के अंतर से अधिक थे. यही पैटर्न जंगपुरा, ग्रेटर कैलाश और छतरपुर में भी देखने को मिला, जहां कांग्रेस के वोटों ने AAP को नुकसान पहुंचाया. जंगपुरा में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया बीजेपी के तरविंदर मारवाह से हार गए, जबकि ग्रेटर कैलाश में स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज को हार का सामना करना पड़ा.
आंकड़ों के अनुसार, कई सीटों पर कांग्रेस के वोटों ने AAP की हार में अहम भूमिका निभाई. जैसे:
नई दिल्ली: बीजेपी की जीत का अंतर – 4,089 वोट, कांग्रेस के वोट – 4,568
छतरपुर: बीजेपी की जीत का अंतर – 6,239 वोट, कांग्रेस के वोट – 6,601
जंगपुरा: बीजेपी की जीत का अंतर – 675 वोट, कांग्रेस के वोट – 7,350
बादली: बीजेपी की जीत का अंतर – 10,661 वोट, कांग्रेस के वोट – 31,130
यही ट्रेंड संगम विहार, मालवीय नगर और राजेंद्र नगर जैसी सीटों पर भी देखने को मिला, जिससे कांग्रेस एक निर्णायक भूमिका में आ गई.
इन नतीजों के बाद दिल्ली की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. बीजेपी ने 27 साल बाद सत्ता में वापसी कर 48 सीटें जीतीं, जबकि AAP सिर्फ 22 सीटों पर सिमट गई. कांग्रेस सीटें न जीतने के बावजूद ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आ गई है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस आने वाले चुनावों में इस स्थिति को कैसे भुनाती है और AAP अपनी सियासी पकड़ को दोबारा मजबूत करने के लिए क्या रणनीति अपनाती है.
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