170 पाकिस्तानी हिंदू परिवारों को बेघर होने का खतरा, मजनू के टीला में चलेगा अतिक्रमण पर बुलडोजर

मजनू के टीला के पास रहने वाले परिवारों का कहना है वे घरों को ध्वस्त करने का अभियान चलाने से पहले उन्हें स्थायी आश्रय प्रदान किया जाए.

Published date india.com Published: July 12, 2024 11:55 PM IST
170 पाकिस्तानी हिंदू परिवारों को बेघर होने का खतरा, मजनू के टीला में चलेगा अतिक्रमण पर बुलडोजर

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की ओर से शहर के ‘मजनू के टीला’ में तोड़फोड़ अभियान चलाए जाने के संबंध में सार्वजनिक नोटिस जारी किया है. इस नोटिस के कारण वहां कई साल से रह रहे पाकिस्तानी हिंदू चिंता में आ गए हैं. कुछ महीने पहले तक 49 वर्षीय पाकिस्तानी हिंदू दयाल दास उनके तीन बच्चों को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत भारतीय नागरिकता दिए जाने के बाद जश्न मना रहे थे. लेकिन सीमित सुविधाओं वाले अपने घर (एक टिन की छत वाला घर) को खोने के डर ने अब दास के परिवार को निराशा में डाल दिया है.

हमारे पास रुकने के लिए कोई और ठिकाना नहीं

दास और कई पाकिस्तानी हिंदू परिवारों का भाग्य शनिवार और रविवार को तोड़फोड़ अभियान चलाने के डीडीए के फैसले से जुड़ा है. दास ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘मैं यहां रहने वाले 170 परिवारों की ओर से अधिकारियों से अनुरोध करता हूं कि वे घरों को ध्वस्त करने का अभियान चलाने से पहले हमें स्थायी आश्रय प्रदान करें. हमारे पास कहीं और ठिकाना नहीं है.

‘चिप्स’ बेचने वाली एक छोटी सी दुकान चलाने वाले दास ने कहा कि उनके परिवार में नौ लोग हैं, जिनमें उनकी पत्नी, बुजुर्ग माता-पिता और बच्चे शामिल हैं. उन्हें ध्वस्तीकरण की कवायद से पहले एक अस्थायी आश्रयस्थल में जाने के लिए कहा गया है.

तोड़फोड़ अभियान से हम सड़क पर आ जाएंगे

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा जारी एक सार्वजनिक नोटिस के अनुसार, 13 और 14 जुलाई को प्राधिकरण मजनू का टीला गुरुद्वारा के दक्षिण में स्थित यमुना के बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ तोड़फोड़ अभियान चलाएगा. पाकिस्तान से पलायन करने वाले लोगों ने इस इलाके में अपने घर बना लिए हैं. मीरा (40) पिछले 12 सालों से मजनू का टीला में रह रही हैं. वह कहती हैं, ‘मेरा परिवार बहुत बड़ा है और अगर हमें यहां से निकाला गया तो हम सड़क पर आ जाएंगे.’

इलाके के छात्रों को पढ़ाने वाली 18 वर्षीय रामकली इस बात पर अड़ी हुई हैं कि वह कहीं और नहीं जाएंगी. दास का कहना है कि अगर उन्हें जबरन दूसरी जगहों पर भेजा गया तो वे विरोध करेंगे.

(इनपुट-एजेंसी के साथ)

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