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Delhi riots 2020: कोर्ट ने शरजील इमाम की जमानत पर फैसला सुरक्षित रखा
दिल्ली 2020 दंगों के पीछे साजिश के आरोप में शरजील इमाम के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानून (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया था
नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत (Delhi court ) ने गिरफ्तार छात्र कार्यकर्ता शरजील इमाम (Sharjeel Imam) की जमानत याचिका (bail plea) पर अपना फैसला (verdict) आज सोमवार को 25 सितंबर के लिए सुरक्षित रख लिया है. दिल्ली 2020 के दंगों (Delhi riots 2020) के ‘मास्टरमाइंड’ होने के आरोप में वह अभी जेल में है.
देश की राजधानी में 2020 के दंगों के पीछे साजिश के लिए के लिए शरजील इमाम के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानून (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) का मामला दर्ज किया गया था. शरजील के वकील ने कोर्ट से इस आधार पर जमानत मांगी इस आधार पर कि वह पहले ही अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम सजा की आधी सजा काट चुका है.
दिल्ली पुलिस ने आवेदन का विरोध करते हुए दावा किया कि इमाम पर कई “गंभीर अपराध” करने का आरोप है.
इमाम के वकील ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) अमिताभ रावत को बताया कि उनका मुवक्किल पहले ही साढ़े तीन साल से अधिक समय जेल में काट चुका है. धारा 13 यूएपीए में अधिकतम सात साल की सज़ा है. उन्हें साढ़े तीन साल हो गए हैं. इसलिए, वह वैधानिक जमानत का हकदार है,”
इस बात पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने अदालत को बताया कि इमाम पहले ही मुकदमे का सामना किए बिना साढ़े तीन साल की कैद काट चुका है, वकील ने कहा कि अभियोजन पक्ष को दोषी साबित होने तक उसे निर्दोष मानना चाहिए. सरकारी वकील ने कहा, समवर्ती वाक्य अपवाद है जबकि लगातार वाक्य एक नियम है. इस तरह, उसे अधिकतम 16 साल की सज़ा दी जा सकती है.”
इमाम इस मामले में 28 जनवरी, 2020 से हिरासत में है, जिसमें पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद, कार्यकर्ता खालिद सैफी, इशरत जहां और सफूरा जरगर जैसे अन्य लोग भी शामिल हैं. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी.
फरवरी 2020 के दंगों के ‘मास्टरमाइंड’ होने के आरोप में आरोपियों पर आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए और भारतीय दंड संहिता के कई प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था. दिल्ली दंगों की हिंसा में 53 लोग मारे गए और 700 से अधिक घायल हो गए थे. ( पीटीआई )
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