
Parinay Kumar
परिणय कुमार को पत्रकारिता में लगभग 14 साल का अनुभव है. वह करियर की शुरुआत से ही पॉलिटिकल और स्पोर्ट्स की खबरें लिखते रहे हैं. 2008 में बिहार के ललित ... और पढ़ें
Kalkaji Assembly Constituency: देश की राजधानी दिल्ली में चुनाव का बिगुल बज चुका है. दिल्ली की सभी 70 विधानसभा सीटों पर 5 फरवरी को वोट डाले जाएंगे और नतीजे 8 को आएंगे. चुनावी सरगर्मियों के बीच सभी पार्टियों ने जोर शोर से अपनी तैयारी शुरू कर दी है. 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में कालकाजी सबसे हॉट सीटों में से एक है. दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी (Atishi) यहां से चुनाव लड़ रही हैं. आतिशी का इस सीट पर मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के रमेश बिधूड़ी और कांग्रेस की अल्का लांबा (Alka Lamba) से है. भाजपा यहां बीते 30 साल से जीत की तलाश में है. देखना होगा कि इस बार रमेश बिधूड़ी (Ramesh Bidhuri) क्या बीजेपी के लिए कोई चमत्कार कर पाएंगे?
कालकाजी विधानसभा सीट पर BJP बीते 3 दशक से जीत दर्ज नहीं कर पाई है. इस बार BJP ने पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी पर भरोसा जताया है. रमेश बिधूड़ी दक्षिणी दिल्ली से लोकसभा सांसद रह चुके हैं. टिकट मिलने के बाद बिधूड़ी ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा था, ‘मुझे मां कालका ने यहां पर बुलाया है, 10 साल में आम आदमी पार्टी की सरकार ने कालकाजी विधानसभा को नर्क बना दिया. जनता इस बार यहां से भाजपा को जीत दिलाएगी और इस सीट पर कमल खिलेगा.’
हालांकि, वह अपने एक बयान को लेकर विवादों में हैं. रमेश बिधूड़ी ने लोकसभा से सांसद प्रियंका गांधी को लेकर एक विवादित टिप्पणी की. रमेश ने कहा, ‘प्रियंका गांधी के गाल की तरह यहां की सड़कें बना देंगे.’ जब कांग्रेस-आप और खुद की पार्टी ने उनके बयान से असहमति जताई तो उन्होंने बयान के लिए खेद भी जताया. बहरहाल, इस सीट पर आम आदमी पार्टी ने 2015 और 2020 में जीत हासिल की है. आम आदमी पार्टी तीसरी बार इस सीट पर जीत हासिल करने का दावा कर रही है. इस सीट पर मुख्यमंत्री आतिशी चुनाव लड़ रही हैं. आतिशी यहां से 2020 में चुनाव जीती थीं.
इस सीट पर 15 साल तक अपना दबदबा रखने वाली कांग्रेस भी जीत का दावा कर रही है. बीते तीन चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा. कांग्रेस ने इस बार यहां से अलका लांबा को टिकट दिया है. तीनों पार्टी के उम्मीदवार मजबूत माने जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि इस सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय होगा. इतिहास की बात करें तो साल 1993 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस सीट पर जीत हासिल की थी. भाजपा की पूर्णिमा सेठी जीती थीं। इसके बाद भाजपा इस सीट पर कभी कमल नहीं खिला पाई है. 1998, 2003 और 2008 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का परचम लहराया था. 2013 में यह सीट शिरोमणि अकाली दल के खाते में गई. 2015 विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने जीत दर्ज की. वहीं, 2020 में आम आदमी पार्टी ने दूसरी बार लगातार इस सीट पर जीत हासिल की.
कालकाजी विधानसभा में टूटी, सड़कें, गंदा पानी, सीवर और बरसात के दिनों में जलभराव की समस्या जटिल हो जाती है. इसके अलावा आवारा पशुओं की वजह से भी यहां पर लोगों को आवागमन करने में काफी परेशानी होती है. ट्रैफिक जाम की समस्या से भी लोगों को जूझना पड़ता है. फुटपाथों पर अतिक्रमण हो रखा है. जिससे पैदल चलने वाले राहगीरों को परेशानी होती है.
इस विधानसभा में सिख समुदाय, ओबीसी, वैश्य, गुर्जर, एससी, मुस्लिम बिरादरी के वोटर्स अच्छे खासे हैं. करीब 27 फीसदी सिख हैं. ब्राह्मण 9 प्रतिशत तो मुस्लिम 7 फीसदी हैं. विधानसभा में पॉश इलाका न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, सुखदेव विहार, महारानी बाग, गोविंदपुरी जैसे इलाके आते हैं. करीब 1.70 लाख मतदाता हैं. इसमें पुरुष वोटर्स करीब 95 हजार और महिला मतदाताओं की संख्या 80 हजार हैं.
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