मुंबई नाव हादसा: एक्सीडेंट के बाद बच्चों को समुद्र में फेंकने जा रहे थे माता-पिता, CISF ने ऐसे बचाई मासूमों की जान

Mumbai Boat Accident: सीआईएसएफ के समुद्री कमांडो की एक टीम ने उन्हें यह आश्वासन देकर रोक लिया कि सभी को बचा लिया जाएगा.

Published date india.com Published: December 20, 2024 11:17 PM IST
मुंबई नाव हादसा: एक्सीडेंट के बाद बच्चों को समुद्र में फेंकने जा रहे थे माता-पिता, CISF ने ऐसे बचाई मासूमों की जान

अभी कुछ दिन पहले मुंबई के समुद्र तट पर एक बोट ने कंट्रोल खो दिया था और फिर वे तट पर खड़ी फेरी से जा टकराई. इस हादसे में 13 लोगों की जान चली गई थी. मरने वालों में दस आम नागरिक और 3 नौसेना के कर्मचारी शामिल थे. अब इस दुर्घटना से जुड़ा एक किस्सा सामने आया है. बताया जा रहा है कि नाव दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के बाद, उसमें सवार घबराए माता-पिता अपने बच्चों को समुद्र में फेंकने को तैयार थे. हालांकि, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के समुद्री कमांडो की एक टीम ने उन्हें यह आश्वासन देकर रोक लिया कि सभी को बचा लिया जाएगा.

घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया

सीआईएसएफ कांस्टेबल अमोल सावंत (36) और उनके दो सहकर्मी 18 दिसंबर की दुर्घटना के बाद सबसे पहले वहां पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया. सावंत ने यहां ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “हम तट से कुछ दूरी पर नियमित गश्त पर थे. तभी हमारे ‘वॉकी-टॉकी’ पर यह सूचना आई कि एक यात्री नौका डूब रही है. मैंने नौका चालक से तेजी से नौका चलाने को कहा और हम कुछ ही समय में 3-4 किलोमीटर दूर घटनास्थल पर पहुंच गए.

बच्चों को समुद्र में फेंक रहे थे मां-बाप

उन्होंने कहा, कि वह दुर्घटना स्थल को देखकर आश्चर्यचकित थे, लेकिन एक प्रशिक्षित सैनिक होने के नाते. मैं समझ गया था कि क्या करना है और कैसे करना है. नवी मुंबई स्थित ‘जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी)’ की सुरक्षा करने वाली सीआईएसएफ इकाई में तैनात जवान ने कहा, हमने देखा कि लोग अपने बच्चों को समुद्र के पानी में फेंकने के लिए तैयार थे. यह सोचकर कि वे डूबते जहाज से बच जाएंगे. मैंने उनसे कहा कि वे घबराएं नहीं और ऐसा प्रयास न करें, हमने जल्द ही स्थिति को संभाल लिया.

टीम ने बच्चों को पकड़ लिया और नाव में ले आए

सावंत ने कहा कि शुरू में जब वे घटनास्थल पर पहुंचे तो वे भी आश्चर्यचकित हो गए थे. लेकिन जब मैंने देखा कि बच्चे डूबती हुई नौका के अवशेषों से खतरनाक तरीके से लटके हुए हैं. उनके असहाय माता-पिता भी, तो मैंने और मेरे साथियों ने बच्चों को पकड़ लिया और उन्हें अपनी नाव में ले आए.

जवान ने बताया कि उन्होंने पहले प्रयास में 6-7 बच्चों को बचाया, उसके बाद महिलाओं और पुरुषों को भी बचाया. सावंत ने बताया, हमारी ओर कई हाथ उठे, कुछ चिल्ला रहे थे, कुछ बस उन्हें बचाने की गुहार लगा रहे थे. हमें सही संख्या नहीं पता कि कितने लोग थे, लेकिन हम उस दुर्भाग्यपूर्ण नौका पर सवार 50-60 लोगों की मदद करने और उन्हें बचाने में सफल रहे.

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