नई दिल्ली. केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर के कपाट अब से थोड़ी देर बाद पारंपरिक मासिक पूजा के लिए खुलने वाले हैं. हालांकि, मंदिर के बाहर लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने कपाट के खुलने का वक्त नहीं बताया है. मंदिर से करीब 20 किलोमीटर दूर निलाकल बेस कैंप में भगवान अयप्पा के सैंकड़ों भक्त ठहरे हुए हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि वे अपने भगवान के दर्शन कब करेंगे. इन भक्तों का कहना है कि अब तक उन्हें प्रशासन की तरफ से यह नहीं बताया गया है कि मंदिर के कपाट कब खुलेंगे. Also Read - महिलाओं के साथ सबरीमला जा रही थीं तृप्ति देसाई, एयरपोर्ट से यहां ले गई पुलिस

 

‘सुप्रीम’ फैसले पर छिड़ा सियासी संग्राम

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भगवान अयप्पा के दरवाजे महिलाओं के लिए खुलने को लेकर केरल में सियासी संग्राम छिड़ा है. बीजेपी, कांग्रेस सहित कुछ दल सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध कर रहे हैं. केरल के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय लोगों का भी विरोध प्रदर्शन जारी है. ऐसे में प्रशासन पूरी तरीके से मुश्तैद है और हर कदम फूंक-फूंक कर उठा रहा है.

जिंदगी और मौत के सवाल पर तनाव

बुजुर्गों और महिलाओं से भरे भक्तों के कई दल निलाकल बेस कैंप के पास कारें, बसें और टैक्सियों को रोक रहे हैं. इन लोगों ने ऐलान कर रखा है कि कपाट खुलने के बाद ‘प्रतिबंधित उम्र’ (10 से 50 वर्ष) की किसी भी बच्ची-महिला को मंदिर परिसर में पूजा के लिए नहीं घुसने देंगे.

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कोर्ट के फैसले पर मुश्तैद केरल सरकार

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 10 से 50 वर्ष उम्र की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में जाने की अनुमति प्रदान की थी. देश की सुप्रीम अदालत ने ये फैसला 28 सितंबर को सुनाया था. केरल सरकार ने भी कोर्ट के फैसले के बाद ये स्पष्ट कर दिया था कि इसके विरोध में पुनर्विचार याचिका नहीं डाली जाएगी.

केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने कहा है कि जो भी सबरीमाला मंदिर प्रार्थना करने जाएगा, उसकी रक्षा की जाएगी. कोई भी कानून को अपने हाथों में नहीं ले सकता. सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि इस प्रकार की घटनाएं न हो.