UP News: 20 जून को एक समाचार चैनल के प्रधान संपादक ने फेसबुक पोस्ट करके अपने साथ लूट की घटना के बारे में जानकारी दी, इस मामले ने इतना तूल पकड़ा की नोएडा पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठना शुरू हो गए, हालांकि नोएडा पुलिस ने अब मामले की जांच करते हुए पत्रकार के झूठ का पदार्फाश कर दिया है. पुलिस ने यह साफ कर दिया है कि, पत्रकार के साथ लूट की घटना नहीं हुई, उन्होंने अपने निजी पारिवारिक कारणों की वजह से इस झूठी कहानी को सोशल मीडिया पर डाला. इससे लोगों में डर पैदा हुआ. वहीं पत्रकार के खिलाफ जल्द पुलिस कार्रवाई भी की जाएगी.Also Read - 'लड़की के साथ दोस्ती का मतलब शारीरिक संबंध बनाने की छूट नहीं', रेप के मामले में बंबई हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

पुलिस द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, 20 जून को पत्रकार द्वारा बताया था कि नोएडा एक्सटेंशन में कुछ बदमाशों ने उन्हें रात में घेर लिया, पत्रकार ने जो कहानी फेसबुक पर लिखी थी, वह काफी भयावह थी, इसके बाद स्वत: संज्ञान लेते हुए पुलिस जांच में जुटी. हालांकि पत्रकार ने अपनी साथ हुई घटना का जिक्र फेसबुक पर तो किया, लेकिन वह इस घटना के खिलाफ तहरीर देने को राजी नहीं थे, उसके बाद पुलिस ने खुद ही मामले की जांच शुरू की. Also Read - सोनिया गांधी के निजी सचिव पर रेप का आरोप, महिला ने उत्तम नगर थाने में दर्ज कराई शिकायत

पुलिस विभाग द्वारा बताया कि, ‘सोशल मीडिया पर पत्रकार द्वारा प्रसारित घटना पर तुरंत प्रभारी निरीक्षक व सभी उच्च अधिकारीगण मय फोर्स तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे. वहीं पत्रकार को फोन कर मौके पर आने के लिए भी कहा गया, लेकिन उनके द्वारा आने से मना कर दिया गया.’ इसके बाद पुलिस ने अगले दिन पत्रकार को थाने आकर तहरीर देने की बात कही, लेकिन उन्होंने ऐसे करने से भी मना कर दिया. हालांकि इस मामले में चौकी प्रभारी राईस सिटी करतार सिंह ने अभियोग पंजीकृत कराया और वरिष्ठ उपनिरीक्षक ऋषिपाल सिंह कसाना ने जांच की. Also Read - इंसानियत शर्मसार, चलती कार में मां और छह साल की मासूम के साथ हैवानियत

मामले की जांच की गई तो पत्रकार द्वारा दिए गए बयान और सर्विलांस रिपोर्ट (सीडीआर व आईपीडीआर) व सीसीटीवी फुटेज से मिली जानकारी आपस में मेल खाती नहीं दिखी. पुलिस के मुताबिक, पत्रकार द्वारा यह भी बताया गया था कि सेक्टर 45 पर वह अपनी किसी महिला मित्र के घर खाने पर गए थे.

पुलिस ने एक महिला मित्र से जानकारी प्राप्त की तो पता चला की 19 जून को शाम 7.00 बजे पत्रकार महिला मित्र के घर खाने पर गए थे. इसी बीच उनकी पत्नी का कॉल आया और वह तुरन्त उनके घर से निकल गए. वहीं रात 1.20 बजे फिर महिला मित्र को कॉल कर पत्रकार द्वारा सड़कों पर अकेला घूमने की बात कही गई और ओयो रूम्स की तलाश करने का भी जिक्र किया. हालांकि उन्होंने इस दौरान किसी लूट की घटना का जिक्र नहीं किया था. पुलिस के मुताबिक, पत्रकार ने ओयो रूम्स में भी अपनै बैंक खाते से पेमेंट की, जिसकी बैंक स्टैटमेन्ट निकलवा ली गई है.

इन सभी तथ्यो को देखते हुए यह प्रमाणित होता है कि पत्रकार के साथ कोई लूट की घटना नहीं हुई है. वहीं पत्रकार द्वारा अपने निजी पारिवारिक कारणों के वजह से इस झूठी घटना को सोशल मीडिया पर डाला. जिसके कारण लोगों में भय व डर पैदा हुआ है जिसके कारण इनके विरुद्ध उचित वैधानिक कार्रवाई जल्द की जाएगी. (IANS Hindi)