प्रेरणादायक ग़ज़लें: आज के वक्त में हर उम्र के लोगों में हौसलें अक्सर कम पड़ जाते हैं. दुनियावी परेशानियों से लैस इस ज़िंदगी में हम अक्सर ख़ुद को मोटीवेट या प्रेरणा देने लिए किसी ख़ास लफ़्ज़ों की तलाश में होते हैं. ये तलाश कभी कोई कहानी कभी कोई गीत तो कभी कोई ग़ज़ल पूरी कर देती है. शायरी के महासागर में ऐसी कई रचनाएं हुई हैं जिसे पढ़ कर या सुनकर कोई भी जोश से भर सकता है. इसीलिए हमने आपका काम आसान करते हुए उस महासागर में डुबकियां लगाकर 5 ऐसी चुनिंदा ग़ज़ल लाए हैं जिसे पढ़ कर आपके ज़हन और दिल में सुगबुगाहट होगी और वो हलचल आपको बड़ी आसानी से मोटिवेशन के रास्ते पर ले जाएगा.

यहां पढ़िए हिंदी में 5 चुनिंदा प्रेरणादायक ग़ज़लें –

दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए:
निदा फ़ाज़ली

दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए

जब तक न साँस टूटे जिए जाना चाहिए

यूँ तो क़दम क़दम पे है दीवार सामने

कोई न हो तो ख़ुद से उलझ जाना चाहिए

झुकती हुई नज़र हो कि सिमटा हुआ बदन

हर रस-भरी घटा को बरस जाना चाहिए

चौराहे बाग़ बिल्डिंगें सब शहर तो नहीं

कुछ ऐसे वैसे लोगों से याराना चाहिए

अपनी तलाश अपनी नज़र अपना तजरबा

रस्ता हो चाहे साफ़ भटक जाना चाहिए

चुप चुप मकान रास्ते गुम-सुम निढाल वक़्त

इस शहर के लिए कोई दीवाना चाहिए

बिजली का क़ुमक़ुमा न हो काला धुआँ तो हो

ये भी अगर नहीं हो तो बुझ जाना चाहिए

हर तरह के जज़्बात का एलान हैं आँखें:
साहिर लुधियानवी

हर तरह के जज़्बात का एलान हैं आँखें

शबनम कभी शो’ला कभी तूफ़ान हैं आँखें

आँखों से बड़ी कोई तराज़ू नहीं होती

तुलता है बशर जिस में वो मीज़ान हैं आँखें

आँखें ही मिलाती हैं ज़माने में दिलों को

अंजान हैं हम तुम अगर अंजान हैं आँखें

लब कुछ भी कहें इस से हक़ीक़त नहीं खुलती

इंसान के सच झूट की पहचान हैं आँखें

आँखें न झुकीं तेरी किसी ग़ैर के आगे

दुनिया में बड़ी चीज़ मिरी जान! हैं आँखें

Read Motivational Shayari in Hindi-

वतन की सर-ज़मीं से इश्क़ ओ उल्फ़त हम भी रखते हैं: 
जोश मलसियानी

वतन की सर-ज़मीं से इश्क़ ओ उल्फ़त हम भी रखते हैं

खटकती जो रहे दिल में वो हसरत हम भी रखते हैं

ज़रूरत हो तो मर मिटने की हिम्मत हम भी रखते हैं

ये जुरअत ये शुजाअत ये बसालत हम भी रखते हैं

ज़माने को हिला देने के दावे बाँधने वालो

ज़माने को हिला देने की ताक़त हम भी रखते हैं

बला से हो अगर सारा जहाँ उन की हिमायत पर

ख़ुदा-ए-हर-दो-आलम की हिमायत हम भी रखते हैं

बहार-ए-गुलशन-ए-उम्मीद भी सैराब हो जाए

करम की आरज़ू ऐ अब्र-ए-रहमत हम भी रखते हैं

गिला ना-मेहरबानी का तो सब से सुन लिया तुम ने

तुम्हारी मेहरबानी की शिकायत हम भी रखते हैं

भलाई ये कि आज़ादी से उल्फ़त तुम भी रखते हो

बुराई ये कि आज़ादी से उल्फ़त हम भी रखते हैं

हमारा नाम भी शायद गुनहगारों में शामिल हो

जनाब-ए-‘जोश’ से साहब सलामत हम भी रखते हैं

आबाद रहेंगे वीराने शादाब रहेंगी ज़ंजीरें:
हफ़ीज़ मेरठी

आबाद रहेंगे वीराने शादाब रहेंगी ज़ंजीरें

जब तक दीवाने ज़िंदा हैं फूलेंगी फलेंगी ज़ंजीरें

आज़ादी का दरवाज़ा भी ख़ुद ही खोलेंगी ज़ंजीरें

टुकड़े टुकड़े हो जाएँगी जब हद से बढ़ेंगी ज़ंजीरें

जब सब के लब सिल जाएँगे हाथों से क़लम छिन जाएँगे

बातिल से लोहा लेने का एलान करेंगी ज़ंजीरें

अंधों बहरों की नगरी में यूँ कौन तवज्जोह करता है

माहौल सुनेगा देखेगा जिस वक़्त बजेंगी ज़ंजीरें

जो ज़ंजीरों से बाहर हैं आज़ाद उन्हें भी मत समझो

जब हाथ कटेंगे ज़ालिम के उस वक़्त कटेंगी ज़ंजीरें

Motivational Ghazals, Motivational Poetry-

सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो:
निदा फ़ाज़ली

सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो

सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो

किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं

तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो

यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता

मुझे गिरा के अगर तुम सँभल सको तो चलो

कहीं नहीं कोई सूरज धुआँ धुआँ है फ़ज़ा

ख़ुद अपने आप से बाहर निकल सको तो चलो

यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें

इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो