निवाड़ी (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव की हलचल है. आज यहां वोटिंग हो रही है. राजनैतिक किस्से बयां किए जा रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश में ऐसे किस्से, ऐसी प्रेमी कहानियां भी हैं, जो यहां की फिजाओं में घुली हुई हैं. मध्य प्रदेश के अहम पर्यटनस्थल रामराजा सरकार की नगरी ओरछा के विशाल महलों के बीच एक राजकुमार और उसकी नृत्यांगना प्रेयसी की यह अधूरी प्रेम कहानी आज भी मिसाल मानी जाती है. ओरछा के राजकुमार ने एक नृत्यांगना से बेहिसाब प्रेम किया, लेकिन शाही परिवार से जुड़े होने के कारण चाहकर भी शादी नहीं कर सका. गम में डूबी उनकी प्रेयसी राय प्रवीण सती हो गई. राजकुमार पागलों की तरह सती हुई प्रेमिका की राख लिए रोता रहा. गम में डूबे राजकुमार ने भी एक साल में ही अपने त्याग दिए. महल में राजकुमार और नृत्य करती उसकी प्रेयसी के बने चित्र इस प्रेम कहानी को जीवंत बनाए हुए हैं. यह कहानी इस इलाके के इतिहास की सबसे सशक्त कहानियों में से एक है. इस प्रेम कहानी ने अकबर को भी प्रभावित किया था.

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जागीर में घूमते समय दिखी थी प्रवीण राय
16वीं शताब्दी में ओरछा बड़ा और सम्रद्ध राज्य था. यहां के राजा मधुकर शाह के तीन पुत्र थे. राजा मधुकर शाह के तीन बेटे थे. इन्होंने 1572 में अपने तीन बेटों वीर सिंह, राम सिंह और इंद्रजीत को अलग-अलग जागीर दे दी. राजकुमार इंद्रजीत सिंह को कछुआ जागीर दी गयी. एक बार राजकुमार इंद्रजीत अपनी जागीर में घोड़े से घूम रहा था. इसी दौरान उसने एक 10-12 साल की लड़की पुनिया को नृत्य कर भजन गाते हुए सुना. राजकुमार ने पुनिया के पिता माधव से बेटी को शिक्षा दिलाने को कहा. माधव ने गरीबी का हवाला दिया. इस पर राजकुमार ने महल में भेज शिक्षा ग्रहण कराने को कहा. यह खबर आग की तरह फैल गई कि गरीब पुनिया महल में राजशाही व्यवस्था के बीच संगीत-नृत्य शिक्षा लेगी.

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राय प्रवीण से इस तरह हुआ प्यार
राजकुमार ने पुनिया की शिक्षा की जिम्मेदारी राज्य के प्रसिद्ध कवि केशवदास को सौंपी. पुनिया नृत्य-गायन में कुछ साल में ही निपुण हो गयी. प्रभावित हुए अविवाहित राजकुमार ने उसका नाम बदल कर राय प्रवीण रख दिया. राय प्रवीण से वह रोज मिलने लगा. बताते हैं कि राय प्रवीण बेहद सुन्दर थी. राजकुमार को उससे प्रेम हो गया. इसके बाद उसने राय प्रवीण के लिए महल बनवाया. उसे तब आनंद मंडल का नाम दिया गया. राय प्रवीण से प्रेम की खबर सुन राजा चिंतित हुए. और राजकुमार की शादी कहीं और कर दी. इससे राय प्रवीण चिंतित रहने लगी. राजा ने राय प्रवीण को कहीं और भेजने का निर्णय लिया. अकबर को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने राय प्रवीण को अपने पास बुलावा भिजवा दिया. राय प्रवीण को भेजने में देरी करने पर अकबर ने ओरछा राज्य पर 1 करोड़ का जुर्माना लगाया था.

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प्रेम कहानी से अकबर भी हुआ प्रभावित
राजकुमार की मर्जी के बिना राय प्रवीण को अकबर के पास आगरा भेज दिया गया. अकबर उनकी सुंदरता देख वह बेहद प्रभावित हुआ. उसने राय प्रवीण को अपने पास ही रहने का आदेश दे दिया. इससे घबराई राय प्रवीण ने एक श्लोक के जरिये अकबर से कहा कि एक राजा को शोभा नहीं देता कि वह झूठी थाली में खाए. वह पहले ही किसी और की हो चुकी है. अकबर इससे प्रभावित हुआ और उसने राय प्रवीण को वापस ओरछा भेज दिया.

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सती हुई प्रेमिका के बाद पागल हुआ राजकुमार, साल भर में हुई मौत
वापस आकर उसने इंद्रजीत से विवाह की इच्छा जताई, लेकिन राजा नहीं चाहते थे कि ऐसा हो. तमाम बंधनों के कारण दोनों की शादी नहीं हो सकी. इससे दुखी हुई राय प्रवीण सती होने का फैसला लिया. इस दौरान राजकुमार अपनी जागीर कछुआ के भ्रमण पर था. पता लगते ही राजकुमार राय प्रवीण को बचाने पंहुचा, लेकिन तब तक देर हो गयी. बताते हैं कि राजकुमार सती हुई राय प्रवीण की चिता की राख लिए काफी देर तक रोता रहा. राजकुमार की मानसिक स्थिति इसके बाद से गड़बड़ हो गयी. एक साल में ही उसकी भी मौत हो गई.

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चित्र हैं इनकी प्रेम कहानी के गवाह
राय प्रवीण के महल में आज भी चित्र बने हुए हैं. इनमे से एक चित्र में राय प्रवीण फूल लिए हुए है और घोड़े पर सवार राजकुमार राय प्रवीण की ओर चलता प्रतीत होता है. इनकी प्रेम कहानी आज भी लोगों के लिए बड़ी उत्सुकता का विषय रहता है. यह प्रेम कहानी बेहद रोचक है. ओरछा के रहने वाले हृदेश बताते हैं कि बचपन से ही उन्होंने राय प्रवीण की कहानी के बारे में सुना था. पर्यटक यहाँ आते हैं तो राय प्रवीण महल ज़रूर देखते हैं. वह बताते हैं कि आज के युवाओं को भी इनकी प्रेम कहानी पसंद आती है. राजशाही शासन से सम्रद्ध रहे इलाकों में यह अकेली ऐसी प्रेम कहानी है, जिसके चर्चे आज भी आम होते हैं.

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