पटना: बिहार से नेपाल जाने वालों के लिए खुशखबरी है. बिहार के बोधगया और पटना से जनकपुर व काठमांडू के लिए नई चार-चार एसी बसों का संचालन शुरू हो रहा है. दोनों रूटों पर 8 बसें चलेंगीं. खास बात यह है कि एसी तो होगी ही, साथ ही बसें पूरी तरह से लग्जरी होंगीं. ये बस सेवा बिहार स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (बीएसआरटीसी) द्वारा शुरू की जा रही है. बीएसआरटीसी के अधिकारियों के अनुसार लग्जरी बस राज्य की राजधानी पटना से जनकपुर, और बोधगया से काठमांडू के लिए चलेंगीं. पटना से जनकपुर की दूरी करीब 210 किलोमीटर होगी. सीतामढ़ी होते हुए जनकपुर पहुंचने में कुल 6 घंटे लगेंगे. इसी तरह बोधगया से काठमांडू 480 किलोमीटर दूर है. काठमांडू पहुंचने में बस 14 घंटे लेगी. बोधगया से काठमांडू बस पटना होते हुए जाएगी.

अब तक बिहार से नहीं थी अंतरराष्ट्रीय बस, बस में ये होंगीं सुविधाएं
बीएसआरटीसी के अधिकारी संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि अब तक बिहार से कोई अंतरराष्ट्रीय बस नहीं थी. काफी समय से यात्रियों द्वारा मांग की जा रही थी. इसी को ध्यान में रखते हुए भारत और नेपाल के बीच अंतरराष्ट्रीय समझौता हुआ. उन्होंने बताया कि बसें एक महीने से भीतर शुरू हो जाएगी. बता दें कि 8 मई, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जल्द ही नेपाल के लिए नई बस सेवायें भी शुरू की जाएंगीं. बीएसआरटीसी की 2015 मॉडल की ये बसें पूरी तरह से लग्जरी होंगीं. सीटें आरामदायक होंगीं, जिन पर यात्री बैठ और लेट भी सकते हैं. सीट बेल्ट होगी. हाथ रखने के लिए सीट के दोनों तरफ ‘आर्मसेट्स’ होंगे. पैर फैलाने के लिए आगे पर्याप्त जगह होगी. बेहद आरामदायक सीट होगी. वाई-फाई, डिजिटल ऑडियो-वीडियो डीवीडी प्लेयर, एलसीडी स्क्रीन, मोबाइल लैपटॉप चार्जर पॉइंट हर सीट पर होगा. मैगजींस भी यात्रियों के पढ़ने के लिए होंगीं.

जनकपुर में जानकी मंदिर स्थित है.

जनकपुर में जानकी मंदिर स्थित है.

इसलिए खास है जनकपुर
जानकी मंदिर 1911 में बनकर तैयार हुआ. इस मंदिर का निर्माण टीकमगढ़ की महारानी वृषभानु ने करवाया था. मंदिर में रखी मंदिर में मां सीता की प्रतिमा प्राचीन है. ये प्रतिमा 1657 के दौर की बताई जाती है. जनकपुर और यहां के जानकी मंदिर से हिंदू धर्म का गहरा और पुराना रिश्ता है. यहां के राजा जनक थे, इसलिए शहर का नाम जनकपुर पड़ा. राजा जनक की पुत्री सीता (जानकी) थीं. सीता के दूसरे नाम जानकी पर ही इस मंदिर का नामकरण हुआ. पुराणों के अनुसार, भगवान श्रीराम से विवाह से पहले सीता ने अपना अधिकतर समय जनकपुर में ही व्यतीत किया था. मंदिर में पूरे साल अखंड कीर्तन चलता है.

काठमांडू में है पशुपतिनाथ मंदिर
नेपाल में एतिहासिक पशुपतिनाथ मंदिर है. इसका नाता भी हिंदू समाज से है. यहां भगवान शिव की अराधना की जाती है. मंदिर में भगवान शिव के साथ उनकी पत्नी पार्वती भी हैं. यह मंदिर यूनेस्को विश्व सांस्कृतिक विरासत स्थल की सूची में है. इस मंदिर का निर्माण सोमदेव राजवंश के पशुप्रेक्ष ने तीसरी सदी ईसा पूर्व में कराया था, लेकिन उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेज़ 13वीं शताब्दी के ही हैं.