तिरुवनंतपुरम. इंसान के भीतर सीखने की चाहत हो, तो उसके लिए कोई काम सीखना या किसी भाषा का ज्ञान भी नामुमकिन नहीं है. कुछ ऐसा ही कर दिखाया है बिहार और ओडिशा के दो मजदूरों ने. अपने राज्य से सैकड़ों किलोमीटर दूर इन दोनों मजदूरों ने केरल में हुई साक्षरता परीक्षा (Literacy Examination) में अव्वल आकर न सिर्फ अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है. बल्कि यह भी साबित कर दिखाया है कि अगर कुछ करने का जज्बा हो तो आपके लिए कोई काम मुश्किल नहीं रह जाता है. केरलवासियों की मातृभाषा मलयालम को आमतौर पर सीखने की दृष्टि से एक कठिन भाषा माना जाता है. हालांकि, ओडिशा की रहने वाली प्रवासी मजदूर मुदाद रेवती और बिहार निवासी मजदूर विकी के लिए यह कोई मुश्किल काम नहीं था. मुदाद और विकी ने कम समयावधि में इस भाषा में निपुणता हासिल कर ली और यहां आयोजित एक साक्षरता परीक्षा में सबसे अधिक अंक अर्जित किए. Also Read - Coronavirus In MP Update: आदिवासी परिवार स्कूल के टॉयलट में क्वारंटीन, सोशल मीडिया पर तस्वीर हो रही वायरल

राज्य सरकार द्वारा संचालित केरल राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण द्वारा आयोजित विशेष परीक्षा में रेवती ने 100 प्रतिशत अंक अर्जित किए. मुदाद यहां आईटी हब टेक्नोपार्क के एक कपड़ा निर्माण कंपनी की एक कर्मचारी हैं. मिशन ने यहां एक विज्ञप्ति में बताया कि मुदाद के अलावा बिहार के रहने वाले एक मजदूर विकी कुमार ने भी 100 प्रतिशत अंक अर्जित किए. 100 अंक की परीक्षा गतिविधि पर आधारित थी. इसमें पढ़ने, लिखने और अंकगणित संबंधी कौशल पर अंक दिए गए. Also Read - सोनिया गांधी के बाद अब तेजस्वी यादव का ऐलान- हम देंगे गरीब मजदूरों की रेलवे यात्रा का किराया

मुदाद ने राज्यव्यापी ‘चानगाटी’ कार्यक्रम के तहत कुछ समय के लिए मलयालम भाषा सीखी. विभिन्न राज्यों से आए कई अन्य प्रवासी मजदूरों के साथ मुदाद ने हाल ही में परीक्षा दी और सोमवार को इसका परिणाम घोषित किया गया. मुदाद ने कहा, ‘‘अपने काम के बाद मैं रोज रात में कम से कम दो घंटा मलयालम सीखती थी.’’ Also Read - मजदूरों पर आतंकी हमले को लेकर परिवार ने दिया बयान, कहा- गैर कश्मीरी थे इसलिए मारा गया

(इनपुट – एजेंसी)