नई दिल्ली. अभी हाल ही में 5 जून यानी विश्व पर्यावरण दिवस बीता है. इस दिन लोग पर्यावरण बचाने, धरती को अगली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखने और न जाने कैसे-कैसे संकल्प लेते हैं. आम तौर पर पर्यावरण संरक्षण के इन संकल्पों को हम कुछ ही दिनों बाद ‘दम तोड़ते’ देखते हैं. लेकिन कुछ लोग हैं जिन्हें वाकई पर्यावरण की चिंता है. खासकर सार्वजनिक जीवन में रहते हुए भी ऐसे लोग पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हैं और दूसरों को भी ऐसा करने की सलाह देते हैं. केंद्रीय मंत्री मनसुख लाल मांडविया (Mansukh Mandaviya) इन्हीं लोगों में से एक हैं. संसद में साइकिल से आने वाले सांसद के रूप में पहचाने जाने वाले मनसुख मांडविया की इस मुहिम को संसद (Parliament) के अन्य सदस्यों की भी सराहना मिली है. मांडविया पिछले महीने राष्ट्रपति भवन में मंत्री पद की शपथ लेने के लिए भी साइकिल चलाकर ही पहुंचे थे.

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संसद में अक्सर साइकिल से आने वाले इस केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह और सदस्यों को भी साइकिल से आने के लिए प्रोत्साहित करेंगे. मनसुख मांडविया ने संसद में साइकिल की सवारी को प्रोत्साहन देने वाली इस मुहिम के अमल में आने की बड़ी रोचक कहानी सुनाई. संसद में साइकिल से आने की शुरुआत करने के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि जब वह राज्यसभा सदस्य बने तो उन्हें स्वर्ण जयंती सदन में एक फ्लैट आवंटित किया गया. उन्हें संसद आने के लिए वाहन का इंतजार करना पड़ता था. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उस दौरान खड़ा रहना पड़ा और 10-15 मिनट तक इंतजार करना पड़ा, जब उसमें (वाहन) देरी हो गई थी … दूरी मुश्किल से आधा किलोमीटर थी, इसलिए मेरे दिमाग में विचार आया कि क्यों नहीं साइकिल से पहुंचा जाए, जो प्रदूषण मुक्त, पर्यावरण के अनुकूल है. मैंने साइकिल चलाना शुरू किया और संसद के सेंट्रल हॉल में पूर्व मंत्री अनिल माधव दवे के साथ चर्चा की.’’

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मनसुख मांडविया ने कहा कि इसके तुरंत बाद संसद में सांसदों का ‘क्लाइमेट क्लब’ बना और दवे ने भी साइकिल चलानी शुरू की. इसके बाद अर्जुन राम मेघवाल, केटी तुलसी, डा विकास महात्मे जैसे अन्य लोग इस क्लब से जुड़े. गुजरात से राज्यसभा सांसद मांडविया ने कहा, ‘‘हमारे पास संसद में एक क्लाइमेट क्लब है … एक समय था जब 8 से 10 सांसद साइकिल से संसद आते थे और इसके सदस्यों की संख्या 46 तक पहुंच गई है… अब मुझे इसे और मजबूत बनाना है और नए सांसदों को इस क्लब से जोड़ना है.’’ यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि दिल्ली जैसे शहर में जहां कुछ महीने पहले तक प्रदूषित हवा की वजह से लोगों का सांस लेना दूभर हो गया था, मनसुख मांडविया जैसे नेताओं की मुहिम पर्यावरण हितैषी है. चुनौती सिर्फ इस बात की है, केंद्रीय मंत्री या सांसदों का यह क्लाइमेट-क्लब अपनी इस मुहिम से आम लोगों को किस हद तक जोड़ पाता है.

(इनपुट – एजेंसी)