नई दिल्ली: छठ बिहार का सबसे लोकप्रिय पर्व है. इसे पूरे देश में धूमधाम के साथ मनाया जाता है. दिवाली के छठवें दिन शुरू होने के कारण इसे छठ पूजा कहते हैं. छठ का त्योहार एक साल में दो बार मनाया जाता है. पहली बार ये त्योहार चैत्र महीने में और दूसरी बार कार्तिक महीने में आता है. भगवान सूर्य की उपासना के साथ छठ पर्व की शुरुआत होती है.

नहाय-खाय से छठ की शुरुआत 

चार दिनों तक चलने वाला ये छठ पर्व 24 अक्टूबर से नहाय खाय के साथ शुरू होगा. 25 अक्टूबर को खरना, 26 अक्टूबर को सांझ का अर्ध्य और 27 अक्टूबर को सूर्य को सुबह का अर्ध्य के साथ ये त्योहार संपन्न होगा.

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छठ पर 34 साल बाद बन रहा महासंयोग

इस बार का छठ पर्व कई मायनो में खास है, क्योंकि 34 साल बाद एक महासंयोग बन रहा है. दरअसल इस बार की छठ पूजा के पहले दिन सूर्य का रवियोग बना रहा है जिसे काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. रवियोग में छठ की विधि विधान शुरू करने से सूर्य हर कठिन मनोकामना भी पूरी करते हैं.अगर कुंडली में किसी व्यक्ति की सूर्य की दशा खराब चल रही हो तो सूर्य की पूजा करने से सभी तरह की परेशानियों का अंत हो जाता है.

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पहला दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय-खाय के रूप में मनाया जाता है. सबसे पहले घर की सफाई कर उसे पवित्र किया जाता है. इसके पश्चात छठव्रती स्नान कर पवित्र तरीके से बने शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करते हैं. भोजन के रूप में कद्दू-दाल और चावल ग्रहण किया जाता है. यह दाल चने की होती है.

ये है छठ पूजा का शुभ मुहूर्त

छठ पूजा के दिन सूर्यादय – 06:41 बजे सुबह
छठ पूजा के दिन सूर्यास्त– 06:05 बजे शाम