नई दिल्ली: कई बड़े पुरस्कारों से नवाजी गईं छत्तीसगढ़ की मशहूर लोक गायिका और एक्ट्रेस पूनम तिवारी के गानों का लोगों ने पहले खूब लुत्फ़ उठाया. उनकी एक्टिंग पर खूब तालियां भी बजाते रहे, लेकिन इस बार जब उन्होंने गाया तो न तालियों की गड़गड़ाहट थी और न ही लोगों की वाह. इस बार उनका गाना लोगों को फूट-फूटकर रुला रहा था. जो वहाँ थे, वो खुद को नहीं रोक पा रहे थे. और जिन्होंने ये वीडियो देखा उनके न सिर्फ रोंगटे खड़े हुए बल्कि उनकी भी आँखें नम हो गईं.

रोने बिलखने की बजाय गाया लोकगीत
छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव में ये मौका ही कुछ ऐसा था. पूनम तिवारी आज के वक़्त की शायद पहली ऐसी मां होंगी जिन्होंने अपने जवान बेटे की मौत पर उसकी अर्थी के सामने रोने-बिलखने की बजाय लोकगीत गाए. एक मां को बेटे की अर्थी के सामने गाने का मार्मिक दृश्य हर किसी को रुला गया. उन्होंने गाने के लिए ढोलक और हारमोनियम बजाने वालों को भी बुलाया. मां या बाप के सामने जवान बेटे की अर्थी हो तो क्या हाल होता है, लेकिन पूनम तिवारी के दर्द बयां करने के इस तरीके से हर किसी को झकझोर कर रख दिया.

इस बार बेटे की आखिरी ख्वाहिश के लिए गाया
दरअसल, पूनम तिवारी के 30 साल के बेटे सूरज तिवारी को ह्रदय रोग था. बेटे सूरज ने अपनी मां से वादा लिया था कि उसकी मौत के बाद वह रोएं नहीं. सूरज की आखिरी इच्छा यही थी कि मां पूनम लोकगीत गाकर दुनिया से विदा करें. पूनम ने अपनी बेटे की आखिरी ख्वाहिश पूरी करने के लिए ऐसा ही किया. उन्होंने अपने दिल पर पत्थर रखकर गाना गाया.

वह गा रही थीं, लोग रो रहे थे
अर्थी के आसपास खड़े लोग रो रहे थे, जबकि वह गा रही थीं. सोशल मीडिया पर लोग उनके हौसले की दाद दे रहे हैं. पूनम ने एक नाटक का प्रसिद्ध गाना ‘चोला माटी के हे राम, एखर का भरोसा’ गाया. ये लोकगीत जीवन की सच्चाई पर आधारित है. ये लोकगीत वह इससे पहले मंच से हजारों बार गा चुकी थीं. इस बार उनकी आवाज़ में दिल दहला देने वाली पीड़ा थी.

सूरज भी थे कलाकार
सूरज तिवारी भी कलाकार थे. रंगकर्मी, संगीतकार सूरज रंगछत्तीसा के संचालक भी थे. उन्हें 26 अक्टूबर को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जहां उन्होंने अंतिम सांस ली थी.

पूनम के पति भी हैं बड़े रंगकर्मी
बता दें कि पूनम के पति दीपक तिवारी बहुचर्चित नाटक ‘चरणदास चोर’ के लिए संगीत नाट्य अकादमी सम्मान से सम्मानित हैं. हबीब तनवीर के इस प्रसिद्ध नाटक के लिए एक्टिंग ने उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाई. अपने ‘सूरज’ के अस्त होने के बाद पूनम के साथ उनके पति भी वहीं मौजूद थे.