Colourful Watermelons: गर्मियों में लोग तरबूज बड़े चाव से खाते हैं. लाल रंग के तरबूजों को देखकर किसी के भी मुंह में पानी आ जाए. पर उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से ऐसी तस्वीरें आई हैं जिन्हें देखकर आपको यकीन ही नहीं होगा कि इतने रंग के तरबूज भी हो सकते हैं. Also Read - Kanpur Encounter: परिवार के एक सदस्य को शासकीय नौकरी और 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

बाराबंकी के किसान अमरेंद्र सिंह के खेत से ये तस्वीरें आई हैं. इनके खेत में पांच रंगों के तरबूज उगे हैं. इन्हें अमरेंद्र सिंह ने ही अपनी मेहनत से सच कर दिखाया है. अब उनका ये प्रयोग लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. Also Read - Sakhi Yojna for Womens in UP: इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीने मिलेंगे 4000 रुपए, जानें इससे जुड़ी खास बातें

आसपास के गांवों से लोग इन तरबूजों को देखने आते हैं. ये तरबूजे न केवल रंग-बिरंगे हैं, बल्कि सेहत में परंपरागत तरबूजों से मीठे और पौष्टिक भी हैं. इसकी खेती देखने के लिए दूर-दराज से लोग आ रहे हैं. Also Read - बदमाशों ने पहले सड़क पर रखी JCB, फिर पुलिस वालों पर AK-47 से चला दीं ताबड़तोड़ गोलियां, जानिए घटना से जुड़ी बड़ी बातें

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के सूरतगंज ब्लॉक का दौलतपुर गांव यूं तो सुमली नदी से लगा हुआ है, मगर यहां के किसानों को ज्यादातर बारिश व निजी सिंचाई पर ही निर्भर रहना पड़ता है. पानी बचाने के लिए अमरेंद्र ने ड्रिप लगा रखा है. खेत में जहां तक संभव है, वह कंपोस्ट खाद का प्रयोग करते हैं.

अमरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि वह तरबूज की खेती पांच साल से कर रहे हैं. लेकिन इस इस बार नयी वैराइटी के तरबूज लगाए। जिन पांच प्रजातियों को उन्होंने लगाया है उनके नाम हैं अनमोल, विशाला ,मन्नत, सरस्वती, अरोही की मुख्य किस्में है. उन्होंने नानयू इंडिया यह मूल रूप से ताइवान की कंपनी है. इसे बीज लेकर अमरेन्द्र ने रंग-बिरंगे तरबूज उगाये हैं. यह फरवरी में लगाया जाता है और मई-जून में तोड़ा जाता है.

उन्होंने बताया कि 75 बीघे में तरबूज की खेती करने में करीब 6 लाख रुपये की लागत आई है. इस सीजन उन्होंने अब तक करीब दो हजार कुतल तरबूज बेचा है, जिसमें 7 लाख रुपये की बचत हुई है. अगर लॉकडाउन न होता तो यह करीब 10 लाख रुपये का मुनाफा देता.

अमरेंद्र ने बताया कि उनके उपजाए तरबूज आम तरबूजों की अपेक्षा काफी मंहगे बिकते हैं. विशाला, आरोही, अनमोल जैसी किस्मों की सर्वाधिक मांग रहती है. लिहाजा, ये मंहगे भी हैं. आरोही 20 रुपये प्रति किलो मंडी में बेचा जाता है. जबकि अनमोल 15 से 18 रुपये के बीच की दर पर बेचा जाता है. यह पूर्वांचल से लेकर नेपाल तक जाता है. इसे लखनऊ, सुल्तानपुर, वाराणसी की मंडी में इसे भेजा जा रहा है. इसमें करीब 25-30 लोग नियमित लोग काम करते रहे हैं.

अमरेंद्र ने बताया कि अनमोल नाम के तरबूज का रंग बाहर से हरा होता है, लेकिन अंदर से नींबू के रंग का होता है. इसका स्वाद भी शहद जैसा होता है. इसी तरह विशाल किस्म का तरबूज बाहर से पीला रंग होता है, अंदर से सुर्ख लाल और बहुत मीठा होता है. आरोही किस्म ऊपर से काला होता है और अंदर का रेशा सोने जैसा चमकीला होता है. सरस्वती किस्म का तरबूज आम तौर पर बाजार में पाया जाता है. इसी तरह मन्नत किस्म का तरबूज भी छोटे आकार का और अंदर से लाल होता है.
(एजेंसी से इनपुट)