Corona Warriors: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का गली-कूचा, मुंह पर मास्क और चेहरे पर बुर्का, तहजीब की एक जीती-जागती मिसाल. इतना ही नहीं, पीठ पर लदे सेनेटाइजर मशीन से लखनऊ को पूरी तरह कोरोना मुक्त करने की जिद ने इसे आम से खास बना दिया है. वजह, उज्मा नाम की इस महिला में न सिर्फ समाज के सुरक्षा की चिंता बल्कि कोरोना को बाहर भागने की जिद भी है. बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने को इकट्ठा किये धनराशि से ही इन्होंने सेनेटाइजर, मशीन और जरूरी सामानों का प्रबंध किया और इस काम में जुट गईं. Also Read - Coronavirus in Kashmir: कोरोना संक्रमित मरीज का इलाज करने वाले पांच डॉक्टर निकले Covid-19 पॉजिटिव

कोरोना संकट में एक से बढ़कर एक योद्घा सामने आए हैं. ऐसी ही योद्धा हैं लखनऊ की सैयद उज्मा परवीन. लॉकडाउन की शुरुआत से लेकर अब तक चेहरे पर मास्क, शरीर पर बुर्का और पीठ पर लदी भारी सेनिटाइजिंग मशीन से राजधानी की गली-गली को सैनिटाइज करने का बीड़ा उठाया है. Also Read - Corona Warriors: नौ महीने की गर्भवती फिर भी रोज जाती है अस्पताल, अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर लोग कर रहे सलाम

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पुराने लखनऊ के सीताराम मंदिर से शुरू हुआ यह सिलसिला लगातार बढ़ रहा है. उज्मा का कहना है, “सेनिटाइज करने के लिए स्प्रेयर मशीन से लेकर केमिकल तक कि खरीदारी उन्हें खुद के खर्चे पर करनी पड़ी है. अब तक 6 से 7 लाख रूपये खर्च हो गये हैं.

सहादतगंज की रहने वाली उज्मा ने बताया कि नगर निगम सेनिटेशन के काम में लगा हुआ था. लेकिन वह हर जगह नहीं पहुंच पा रहा है. फिर उन्होंने लॉकडाउन की शुरुआत से खुद को इस काम में झोंक दिया. उन्होंने बताया कि लखनऊ की गलियों में रोज सेनिटेशन कर रहीं हैं.

उज्मा ने बताया कि अभी तक बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन, सभी पुलिस थाने, चौकी, पेट्रोल पम्प फैजुल्लागंज, बालागंज, कैम्पल रोड, जमा मस्जिद, खदरा, ठाकुरगंज, सहादतगंज, मंसूर नगर, इन्दिरा नगर, गोमती नगर, कृष्णा नगर, आलमाबाग चिनहट के इलाको में खुद जाकर सेनिटाइज किया है.

उन्होंने बताया कि यह प्रेरणा उनके पिता से मिली है. समाज सेवक के रूप में उन्होंने बहुत काम किया है. वे बताया करते हैं कि खुद के कदम बढ़ाने से हर समाज के लोग जुड़ते जाते हैं.

परवीन ने बताया कि वह सुबह 4 बजे से निकालकर 10 बजे तक वापस आती हैं. फिर, परिवार की जिम्मेदारी संभालती है. सहूलियत के लिए 6-6 घंटे की शिफ्ट बनाई है. पूरा लखनऊ सेनिटाइज करने का इरादा है. जब तक यह कोरोना हार नहीं जाता तब तक उनके कदम नहीं रुकेगें.

वह समाज को सकारात्मक संदेश दे रही हैं. पर्दे में हिजाब वाली महिलाएं भी इस बीमारी से लड़ सकती हैं. उनके इस काम को लेकर पति ने पहले थोड़ा एतराज जताया था, लेकिन जब हौसला कम नहीं हुआ, तब वे भी इस काम में मदद करने लगे.
(एजेंसी से इनपुट)