नई दिल्लीः कोरोना वायरस के बीच देश में जारी हुए लॉकडाउन ने लोगों को उनके घरों तक ही सीमित कर दिया है. सोशल डिस्टेंसिंग के चलते लोग अपने घरों में होने के बाद भी अलग-थलग हो गए हैं. ऐसे में लोग टीवी, मोबाइल और इंटरनेट के सहारे अपना समय बिता रहे हैं. इस बीच विशेषज्ञों का कहना है कि, लॉकडाउन के बीच भी अपराधी अमानवीय काम करने से बाज नहीं आ रहे हैं और इस बीच महिला अपराधों में हुई वृद्धि सबसे अधिक विचारनीय है. ताजा आंकडों के मुताबिक, लॉकडाउन के बीच महिलाओं के खिलाफ साइबर क्राइम (Cyber Crime Against Women) में काफी वृद्धि हुई है. Also Read - कोरोना: 24 घंटे में सबसे अधिक 7,965 मामले सामने आए, संक्रमितों की संख्या 1 लाख 68 हज़ार पार

राष्ट्रीय महिला आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, लॉकडाउन के बीच महिलाओं के खिलाफ होने वाले यौन शोषण, घरेलू हिंसा और मारपीट की घटनाओं में काफी वृद्धि हुई है. अप्रैल माह में महिलाओं के खिलाफ होने वाले साइबर क्राइम में 54 शिकायतें ऑनलाइन दर्ज हुईं. जबकि मार्च में 37 शिकायतें सामने आई थीं और वहीं फरवरी में 21 शिकायतें ही दर्ज की गई थीं. लॉकडाउन के बीच ऑनलाइन शिकायतों में काफी वृद्धि हुई है. Also Read - 31 मई के बाद दिल्ली में खुल जाएंगे धार्मिक स्थल और मॉल में दुकानें! दिल्ली सरकार ने दिए संकेत

आकांक्षा फाउंडेशन की संस्थापक आकांक्षा श्रीवास्तव के मुताबिक, 25 मार्च से 25 अप्रैल तक उन्हें साइबर अपराध की कुल 412 शिकायतें मिली थीं. जिनमें से 396 शिकायतें ऐसी थीं, जो काफी गंभीर थीं. इसमें महिलाओं के साथ मारपीट, दुर्व्यवहार, अश्लील वीडियो, धमकी, गाली-गलौज और फिरौती की मांग से लेकर ब्लैकमेलिंग तक शामिल है. Also Read - यूपी में कोरोना के 275 नए केस, संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 7,445 हुआ, बढ़ी मृतकों की संख्‍या

बता दें यह संगठन लोगों को महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध को लेकर जागरूक करने का काम करता है. आकांक्षा श्रीवास्तव के मुताबिक, लॉकडाउन के बीच उन्हें हर रोज औसतन 20 से 25 शिकायतें मिल रही हैं, जबकि लॉकडाउन से पहले तक यह संख्या काफी कम थी. इससे पहले उन्हें रोजाना 10 या उससे कम शिकायतें ही मिलती थीं.