नई दिल्ली: दिल्ली के अग्निकांड (Delhi Grain Market Fire) में 43 मौतों ने सभी को झकझोर कर रख दिया. सब सकते में हैं. परिवार अपनों को खोकर सिसक रहे हैं. वहीं, इस दर्दनाक हादसे के बाद ऐसी मिसालें भी सामने आ रही हैं जो गर्व करने वाली हैं. लोग कह रहे हैं कि ये देश ऐसी ही मोहब्बतों से बना है. इस घटना का शिकार हुए अपनी ज़िंदगी के आखिरी चार-पांच मिनट में मुशर्रफ अली (Musharraf Ali) ने अपने जिस दोस्त को कॉल किया, वही मोनू अग्रवाल (Monu Agrawal) अब मुशर्रफ के परिवार की जिम्मेदारी उठाने को तैयार हैं. मोनू कहते हैं कि शायद भगवान ने मुझे अविवाहित रखा. मुशर्रफ के बच्चे अब मेरे बच्चे हैं. मोनू अग्रवाल का कहना है कि मेरी दोस्ती (Friendship) मज़हब-धर्म से कहीं ऊपर है. मेरे दोस्त ने अपनी ज़िंदगी के आखिरी पलों में अपने परिवार को फ़ोन न कर, मुझे कॉल किया. मैं अपने दोस्त का भरोसा मरते दम तक कायम रखूंगा.

दिल्ली की अनाज मंडी में अग्निकांड के शिकार हुए मुशर्रफ अली उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बिजनौर के रहने वाले थे. वह अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले थे. इकलौते बेटे थे. कुछ समय पहले ही वह दिल्ली में काम के लिए फैक्ट्री में आए थे. मुशर्रफ के दोस्त मोनू अग्रवाल बिजनौर में रहते हैं. 33 साल के मोनू बिजनौर में बर्तन का कारोबार करते हैं. जो भी पूछता है उसे रुंधे गले से मोनू अपनी और मुशर्रफ की दोस्ती के किस्से सुनाने लगते हैं. मोनू अग्रवाल कहते हैं कि दुनिया छोड़ने से पहले मेरे दोस्त मुशर्रफ ने मुझसे जो कहा उसे याद कर सहम जा रहा हूं. मैं उस समय बहुत बेबस था. चीखने चिल्लाने की आवाज़ें आ रही थीं. मुशर्रफ ने मुझसे कहा कि ‘मुझे इस दुनिया में सिर्फ तुम्हीं पर भरोसा है. इसलिए सिर्फ तुम्हें ही कॉल कर रहा हूं. मैं मरने वाला हूं. मेरे परिवार का ख्याल रखना. मेरी डेड बॉडी लेने आ जाना.’ मोनू दिल्ली में अपने दोस्त का शव लेने उसके परिवार को लेकर पहुंचे.

मोनू कहते हैं कि उस दर्द और बेबसी को बयां नहीं किया जा सकता जो मैंने सुनी और महसूस की. वह बताते हैं कि मैं कभी कॉल रिकॉर्ड नहीं करता था लेकिन ये किसी तरह रिकॉर्ड हो गई. वह अपनी दोस्ती के बारे में बताते हैं कि मुशर्रफ और मैं बचपन के दोस्त थे. हमने कभी महसूस नहीं किया कि हम अलग धर्मों के थे. हमने एक दूसरे से कभी कोई बात नहीं छिपाई. जब मिलते तो घंटों बतियाते थे. हमारी जान एक दूसरे में बसती थी. मोनू और मुशर्रफ की बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हो रहा है. मोनू कहते हैं कि मेरे लिए मुशर्रफ भाई से बढ़कर था. वह बताते हैं कि हमारे घर पास ही पास हैं.

वह कहते हैं कि अपनी ज़िंदगी के आखिरी पलों में भी मेरे दोस्त ने सिर्फ मुझ पर भरोसा किया. ये बड़ी बात है. मुशर्रफ के चार बच्चे, पत्नी और उसकी मां हैं. इन सब की जिम्मेदारी अब मेरे कंधे पर है. मैं परिवार को संभालने के लिए तैयार हूं. शायद मैं इसी वजह से अविवाहित रहा. निजी कारणों से मैंने शादी नहीं की. अब मुशर्रफ के बच्चे अब मेरे बच्चे हैं. मैं सब की जिम्मेदारी उठाऊंगा.