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नई दिल्ली/बेंगलुरू: बेगलुरू में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में मानव संसाधन अधिकारी 32 वर्षीया कृतिका अय्यर एक पारंपरिक परिवार से हैं। लेकिन वह वाइन को कोई वर्जना का विषय नहीं मानती हैं।

आमतौर पर शनिवार को वह अवकाश के दिन वाइन खरीद लिया करती हैं। उसके लिए रेस्तरां में शराब परोसने वाले से बात करना किसी रोमांचक कारनामे जैसा नहीं है।

वह और उनके पति आम तौर पर रविवार को दिन में साथ बैठकर वाइन लिया करते हैं।

महिलाओं में वाइन की स्वीकार्यता तीन कारणों से बढ़ी है : सामाजिक स्वीकार्यता, दूसरे विकल्पों की तुलना में सेहत के लिए बेहतर और शहरों में खुले शराब की संभ्रांत दुकानें जहां इसे लेने के लिए धक्का-मुक्की नहीं करनी पड़ती है।

दिल्ली वाइन क्लब की सह-संस्थापक राधिका बहल ने आईएएनएस से कहा, “भारत के लोग आजकल वाइन को लेकर सहज हैं और इसमें महिलाएं भी शामिल हैं। पार्टियों में भी वाइन परोसी जा रही है।”

बहल ने कहा, “महिलाओं में वाइन लेने का मुख्य कारण यह है कि अन्य शराब की तुलना में यह कम तेज होती है। एक-दो गिलास रेड वाइन लेना सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है।”

महिलाएं इसलिए भी वाइन पसंद करती हैं, क्योंकि इसमें अल्कोहल का स्तर कम होता है।

तेज शराब में जहां 40 फीसदी तक अल्कोहल होता है, वहीं वाइन में यह 11 से 15 फीसदी तक होता है।

शीतल पेय अब फैशन की चीज नहीं रह गई है।

दिल्ली वाइन क्लब के संस्थापक अध्यक्ष और इंडियन वाइन अकादमी के अध्यक्ष सुभाष अरोड़ा ने कहा, “उच्च मध्यवर्गीय परिवार की महिलाओं में शराब का सेवन बढ़ा है। क्योंकि परिवार के अन्य सदस्य मानते हैं कि इसमें कम अल्कोहल होता है, इसलिए यह महिलाओं के लिए मुफीद है।”

अरोड़ा ने आईएएनएस से कहा, “आजकल कई रेस्तरां में भी शराब परोसने वाले रखे जाते हैं। विदेश यात्रा के कारण भी शराब का प्रचलन बढ़ा है।”

भारत में आस्ट्रेलिया के पूर्व उच्चायुक्त और दक्षिण आस्ट्रेलिया सरकार के वरिष्ठ सहायक राकेश आहूजा ने आईएएनएस से कहा, “1990 के दशक में लोग मुश्किल से वाइन के बारे में जानते थे। अब चीजें बदल रही हैं। इसका कारण है मध्य वर्ग का बढ़ता आकार।”

आहूजा ने कहा कि ब्रिटिश राज में लोग जिन या व्हिस्की लिया करते थे। महिलाएं आम तौर पर जिन लिया करती थीं, क्योंकि व्हिस्की को पुरुषों का शराब माना जाता था। उन्होंने कहा, “तब महिलाओं के पास अधिक विकल्प नहीं थे, लेकिन आज स्थिति काफी तेजी से बदल रही है।”