नई दिल्ली. कभी मुंबई पुलिस की मोस्ट वांटेड अपराधियों की लिस्ट में रहे और वर्तमान में हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर अरुण गवली ने महात्मा गांधी के आदर्शों पर आयोजित परीक्षा में सभी को पछाड़ते हुए प्रथम स्थान हासिल किया है. नागपुर केंद्रीय कारागार में बंद गवली ने परीक्षा में 80 में से 74 अंक अर्जित किए हैं. गैर सरकारी संगठनों-सहयोग ट्रस्ट, सर्वोदय आश्रम और मुम्बई सर्वोदय मंडल द्वारा पिछले साल अक्टूबर में आयोजित परीक्षा में लगभग 160 कैदी शामिल हुए थे. इसमें डॉन अरुण गवली ने 92.5 प्रतिशत अंक हासिल कर परीक्षा में टॉप किया है. सहयोग ट्रस्ट के न्यासी रवींद्र भुसारी ने बताया कि परीक्षा का परिणाम पिछले सप्ताह घोषित किया गया. भुसारी ने कहा कि परीक्षा में बैठना अनिवार्य नहीं होता और कैदी अपनी मर्जी से इसमें शामिल होते हैं.

मराठी भाषा में दिए थे सवालों के जवाब

नागपुर जेल की एसपी रानी भोंसले ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि कैदियों को एक महीने पहले स्टडी मटेरियल दिया जाता है. उन्हें पढ़ाने की सुविधा नहीं दी जाती और न ही कोई शिक्षक उपलब्ध कराया जाता है. हमेशा गांधी टोपी पहनने वाले गवली ने इस परीक्षा में टॉप कर जेल अधिकारियों को हैरान कर दिया है. डॉन अरुण गवली ने परीक्षा में आए सभी प्रश्नों के जवाब मराठी भाषा में दिए थे. सहयोग ट्रस्ट के रवींद्र भुसारी ने बताया कि परीक्षा में कैदियों को 80 सवालों के वस्तुनिष्ठ जवाब देने होते हैं. उत्तीर्ण होने वालों को पुरस्कार के रूप में प्रमाणपत्र और खादी के वस्त्र मिलते हैं. उन्होंने कहा, ‘परीक्षा से पहले जेल में गांधी जी की किताबों से संबंधित पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई गई थी. परीक्षा में दोषी, विचाराधीन और सजा काट रहे कैदी शामिल हुए.’

दगड़ी चाल में डैडी के नाम से चर्चित था गवली

मुम्बई के दगड़ी चॉल इलाके में लोग अरुण गवली को ‘डैडी’ के नाम से जानते थे. गवली बाद के दिनों में राजनीति के मैदान में भी उतरा था और उसने अखिल भारतीय सेना के नाम से अपनी पार्टी बनाई थी. पिछले साल उसके जीवन पर एक फिल्म आई थी. अभिनेता अर्जुन रामपाल ने ‘डैडी’ शीर्षक वाली इस फिल्म में गवली की भूमिका निभाई थी. बता दें कि मुंबई का चर्चित डॉन अरुण गवली वर्ष 2007 में हुई शिवसेना के पार्षद कमलाकर जामसंदेकर की हत्या के मामले में नागपुर केंद्रीय कारागार में उम्रकैद की सजा काट रहा है. उसे वर्ष 2012 में 11 अन्य लोगों के साथ मामले में दोषी ठहराया गया था. आपराधिक मामलों की लंबी सूची रखने वाले गवली की यह पहली दोषसिद्धि थी.

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