महागौरी के कई रूपों में एक रूप मां धूमावती भी हैं। मां धूमावती के बारे में बहुत से लोग नहीं जानते हैं। मां धूमावती का भारत में एक मात्र मंदिर मध्य प्रदेश के दतिया जिले में स्थित है, विदेशों से भी लोग इनके दर्शन करने के लिए यहां आते हैं। सच्चे दिल से पूजा करने वाले भक्तों को मां कभी कोई कमी नहीं होने देतीं और हर समय रक्षा करती रहती हैं। कहा जाता है
मां धूमावती ने अपने पति को ही खा लिया था। Also Read - दतिया के पीताम्बरा शक्तिपीठ पहुंचे राहुल गांधी, मंदिर में की देवी मां की पूजा- अर्चना

पुराणों के अनुसार एक बार कैलाश पर घूमते वक्त देवी पार्वती बहुत भूख लगने लगती है और वह भगवान शिव से कुछ भोजन की मांग करती हैं। उनकी बात सुनकर महादेव, देवी
पार्वती जी से कुछ समय इंतजार करने के लिए कहते हैं ताकि वह भोजन का प्रबंध कर सकें, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी जब भोजन की व्यवस्था नहीं हो पाती तो देवी
पार्वती भूख से व्याकुल हो उठती हैं और वे अपनी भूख शांत करने के लिए भगवान शिव को ही निगल जाती हैं। महादेव को निगलने पर देवी पार्वती के शरीर से धुआं निकलने लगता
है और उनका शरीर विकृत और श्रृंगार रहित हो जाता है। तब भगवान माया द्वारा देवी पार्वती से कहते हैं कि धूम्र से व्याप्त शरीर के कारण तुम्हारा नाम आज से धूमावती होगा। चूंकि तुमने मुझे खा लिया है इस लिए आज से तुम विधवा हुईं और अब से इसी भेष में तुम्हारी पूजा हुआ करेगी। देवी के विधवा स्वरूप के कारण ही सुहागिन स्त्रियां को इनके दर्शन और पूजन करने की मनाही है। पुराणों की दस महाविद्याओं में देवी को दारुण विद्या माना गया है।  यह भी पढ़ें:  मां दुर्गा का शांति और तपस्विनी रूप “ब्रह्मचारिणी” जानिए कैसे हुआ मां का जन्म

मां धूमावती का रूप बेहद दी भयंकर और कुरूप है। मां एक विधवा हैं, उनके बाल खुले हुए हैं और वे गंदी और फटी हुई सी सफेद साड़ी में कौवे पर सवार रहती हैं। इनके हाथ में सूप है। मां धूमावती को नमकीन व्यंजन बहुत पसंद हैं। इन्हें उसी का भोग लगता है। देवी को विशेष तौर पर प्याज और दाल की पकौड़ियों का भोग लगता है। देवी की पूजन के लिए शनिवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है। दतिया  में इनके मंदिर में शनिवार के दिन भक्तों की खूब भीड़ लगती है।