Google Doodle On Elena Cornaro Piscopia’s 373rd Birthday: गूगल का होमपेज खोलते ही आज आपको एक महिला की तस्वीर दिखी होगी. इस महिला के बारे में सबसे महत्वपूर्ण जानकारी बस इतनी है कि इनका नाम एलिना कोर्नेरो पिस्कोपिया (Elena Cornaro Piscopia) है. पिस्कोपिया को दुनिया की पहली महिला पीएचडी धारक (Ph.D Degree holder) होने का गौरव प्राप्त है. धार्मिक विषयों की जानकार और दार्शनिक के रूप में पहचान बनाने वाली एलिना पिस्कोपिया का आज 373वां जन्मदिन है. इनका जन्म इटली के वेनिस शहर में 5 जून 1646 ईस्वी को हुआ था.

ऐसे समय में जबकि शिक्षा पर पूरी तरह से चर्च का नियंत्रण था. किसी महिला के लिए धार्मिक विषयों या दर्शनशास्त्र का अध्ययन करना संभव नहीं था, पिस्कोपिया ने धार्मिक और दर्शनशास्त्र से जुड़ी शिक्षा हासिल की. 32 साल की अवस्था में पिस्कोपिया ने डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की. 17वीं शताब्दी में एलिना कोर्नेरो पिस्कोपिया का ऐसा कारनामा करना वस्तुतः ऐतिहासिक है. एलिना जैसी महिलाएं ही हैं, जिनके नक्शे-कदम पर चलकर बाद के वर्षों में महिलाओं को शिक्षा संबंधी और अधिकार हासिल हुए. पढ़ने-लिखने के प्रति गंभीर एलिना की प्रतिभा को उनके माता-पिता ने बचपन में ही भांप लिया था. इसलिए जब वह महज 7 साल की थीं, उनके माता-पिता ने उन्हें ग्रीक और लैटिन भाषा की शिक्षा देने की शुरुआत कर दी. बाद के दिनों में एलिना ने हीब्रू, स्पेनिश, फ्रेंच और अरबी भाषाओं का भी ज्ञान प्राप्त किया.

धर्म और दर्शन से जुड़े विषयों पर एकाधिकार रखने वाली एलिना कोर्नेरो पिस्कोपिया के अध्ययन के विषयों का संसार बड़ा व्यापक था. इसलिए दुनिया की कई प्राचीनतम भाषाओं के ज्ञान के साथ-साथ उन्होंने गणित और अंतरिक्ष विज्ञान का भी अध्ययन किया. अपनी प्रतिभा की बदौलत कुछ ही दिनों में तत्कालीन इटली के शिक्षा जगत में धाक जमाने वाली एलिना बहुत कम समय में वेनेटियन सोसायटी ऑफ एकेडेमिया (Venetian society Accademia dei Pacifici) की अध्यक्ष चुन ली गई थीं. इसके बाद 1672 ईस्वी में उन्हें यूनिवर्सिटी ऑफ पैडुआ (University of Padua) में दाखिला मिला. इस विश्वविद्यालय में दाखिला मिलना ही उस समय बड़ी बात मानी जाती थी. ऐसे में एलिना ने जब धर्म संबंधी विषय में पीएचडी के लिए अपना आवेदन दिया, तो इसे तत्काल खारिज कर दिया गया.

17वीं शताब्दी के यूरोप में किसी महिला के लिए जब शिक्षा अर्जन करना ही, पुरुष समाज को हेय नजर आता था, उस स्थिति में एलिना कोर्नेरो पिस्कोपिया को उनका विश्वविद्यालय धर्म-दर्शन में पीएचडी करने की इजाजत भला क्यों देता. लेकिन वह एलिना ही थीं, जिन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने जब देखा कि धर्म पर उन्हें पीएचडी करने की इजाजत नहीं मिलेगी, तो अपने पिता के सहयोग से एलिना ने दर्शनशास्त्र में आवेदन दिया. 1678 ईस्वी में पीएचडी के लिए उनकी मौखिक परीक्षा ली गई, जिसमें यूनिवर्सिटी ऑफ पैडुआ के शिक्षक, सीनेटर्स, छात्र और बड़ी संख्या में इटली के जाने-माने विद्वान आमंत्रित अतिथि के रूप में बुलाए गए थे. इन सबके बीच परीक्षा देने के बाद एलिना के पीएचडी का आवेदन पास हुआ.