लखनऊ, 5 मार्च :  होली के मौके पर यूं तो अब नशे के लिए कई तरह के पेय पदार्थ हैं, लेकिन देश के इस हिस्से में देश के उत्तरी हिस्से की तरह होली बच्चुओं के लिए एक खेल का एक बड़ा टिकट ही लेकर आता है। भांति-भांति की पिचकारी से भले ही मौसम अपना जो रंग दिखाए यहां शहर के विस्तृत भूभाग में शुक्रवार को होली धूमधाम से होना तय है।  और जब लोग विभिन्न रंगों, ब्रांडों और स्वादों वाले पेय में डुबकी लगाने के लिए जमा होंगे तब बिना नशे का पेय पदार्थो का राजा ‘ठंडई’ अपने शबाब पर होगा। यह पेय मेबों, केसरिया और चुने हुए मसालों का मिश्रण होता है। इससे इतर भांग का योगदान शहर के पुराने लोगों को अपने बाल खुले रखने में मददगार होगा।

लेकिन बदलते समय में ठंडई में बहुत सा बदलाव आ चुका है। चूंकि त्योहार के रंग में अन्य चीजें भी शामिल हैं तो ठंडई भी अब कई रंगों और प्रकारों में उपलब्ध है। पुराने शहर में ठंडई की पुरानी परंपरा आज भी चलन में है जिसमें ढेर सारा दूध, काली मिर्च का पाउडर, सौंफ, गुलाब की पंखुड़ियां, काजू, बादाम और बहुत कुछ रहता है। नए युग की ठंडई निश्चित रूप से व्यस्त रहने वालों की पहली पसंद है।

बाजार में उपलब्ध ठंडई मिश्रण नए स्वादों और खुशबुओं की पेशकश है। इसमें ‘आम इमली’, ‘स्ट्राबेरी’, ‘नींबू’, ‘शाही केवड़ा’, ‘आम’, ‘गुलाब’, ‘केसरिया’ और ‘सूखे बादाम का सीरप’ आदि होते हैं। इस बार की होली के लिए अपनी पसंद के ब्रांडों की ठंडई की बोतलें लेने वाले पुलकित टंडन ने आईएएनएस को बताया, “विभिन्न श्रेणी के कई प्रकार हमें बेहतर स्थिति में ला खड़ा करते हैं। हमारे पास स्वाद भी होता है और हम पुरानी परंपरा के साथ भी जुड़े रहते हैं।”

आईटी पेशेवर गौरव सिंह ने होली के लिए ठंडई के बेहतर विकल्प होने के पक्ष में दलील पेश करते हुए कहा, “जहां अन्य नशीले पेय हर समय के लिए होते हैं, वहीं ठंडई एक दिन के लिए है और हम पूरी तरह इसका आनंद लेते हैं।”