नई दिल्ली. मंगलवार को जब सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ भारतीय दंड संहिता की धारा 377 पर सुनवाई कर अपना फैसला सुरक्षित रख रही थी, लगभग उसी समय बौद्धिक रूप से सशक्त माना जाने वाला पश्चिम बंगाल का समाज एक अनोखे आयोजन का गवाह बन रहा था. जी हां, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में 17 जुलाई को देश में पहली बार ट्रांसजेंडर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. यह आयोजन किसी निजी साहित्यिक संस्था ने नहीं, बल्कि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन काम करने वाली संस्था साहित्य अकादमी ने कराया. इसलिए भी पहले ट्रांसजेंडर कवि सम्मेलन का महत्व बढ़ जाता है. ढाई घंटे तक चले इस कवि सम्मेलन में 6 से ज्यादा ट्रांसजेंडर कवयित्रियों ने अपनी कविताएं पढ़ीं. Also Read - TMC एमपी मिमी चक्रवर्ती को कैब ड्राइवर ने किए अभद्र इशारे और कमेंट, पुलिस ने किया अरेस्‍ट

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पहली ट्रांसजेंडर कॉलेज प्रिंसिपल ने की अध्यक्षता Also Read - चलती कार में महिला के साथ घिनौनी हरकत कर रहा था शख्स, न मानने पर महिला ने किया कुछ ऐसा...

कोलकाता में आयोजित किए गए पहले ट्रांसजेंडर कवि सम्मेलन की अध्यक्षता मानबी बंद्योपाध्याय ने की. मानबी बंद्योपाध्याय देश की पहली ट्रांसजेंडर हैं जो किसी कॉलेज के प्रिंसिपल पद पर पहुंची हैं. सम्मेलन में उन्होंने अपनी लिखी कई कविताओं का पाठ किया. उनके अलावा 5 और ट्रांसजेंडर कवयित्रियों ने इस सम्मेलन में अपनी कविताएं पढ़ीं. इनमें रानी मजूमदार, अरुणा नाथ, अंजलि मंडल, देबदत्ता बिस्वास और देबज्योति भट्टाचार्य शामिल थीं. कवि सम्मेलन में हर व्यक्ति को कविता पाठ करने के लिए 15-15 मिनट का समय दिया गया था. इन कवयित्रियों के अलावा सम्मेलन में दो ट्रांसजेंडर कवियों को बतौर अतिथि बुलाया गया था. इस मौके पर मानबी बंद्योपाध्याय ने कहा कि ऐसे आयोजनों से ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रयासों को बल मिलता है. उन्होंने कहा, ‘हम सभी लोगों के भीतर प्रतिभा है, लेकिन हमें खुद को साबित करने का अवसर ही नहीं मिल पाता है. इस तरह के आयोजनों से ट्रांसजेंडर समुदाय को हिम्मत मिलती है, साथ ही उनकी कोशिशों को बल मिलता है. मैं साहित्य अकादमी की शुक्रगुजार हूं कि उसने ट्रांसजेंडरों को प्रोत्साहित करने के लिए इस तरह का आयोजन किया.’

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर

ऐसे समय में जबकि सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संविधान पीठ IPC की धारा 377 को लेकर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही हो, ट्रांसजेंडर कवि सम्मेलन का आयोजन काफी अहम माना जा रहा है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई पूरी की. मामले पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा. संविधान पीठ ने बीते 10 जुलाई से सुनवाई शुरू की थी, जो चार दिनों तक चली. मानबी बंद्योपाध्याय सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले को लेकर काफी उत्साहित हैं. उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले पर पूरे देश की निगाह टिकी हुई है. बंद्योपाध्याय ने कहा, ‘देश में ट्रांसजेंडरों को सम्मान की नजर से देखा जाता है. इसलिए हमें थर्ड-जेंडर की संज्ञा दी जाती है. हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इन बातों को ध्यान में रखते हुए हमारे पक्ष में फैसला सुनाएगा.

सेक्शन 377 पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला बाद में

आयोजन के लिए अकादमी को मिली बधाई

साहित्य अकादमी द्वारा कोलकाता में आयोजित ट्रांसजेंडर कवि सम्मेलन की देशभर में सराहना की जा रही है. अकादमी के देश के विभिन्न राज्यों में केंद्र हैं, लेकिन कोलकाता केंद्र द्वारा इस तरह की पहल किए जाने की हर तरफ प्रशंसा हो रही है. अकादमी के पूर्वी क्षेत्र के कार्यालय प्रभारी मिहिर साहू ने बताया, ‘अकादमी पहले भी महिला सशक्तीकरण से संबंधित कई कार्यक्रम कराती रही है. इसलिए जब मानबी बंद्योपाध्याय ने मेरे सामने ट्रांसजेंडर कवि सम्मेलन का प्रस्ताव रखा, तो इससे इनकार करने का सवाल ही नहीं उठता था. मुझे इस सम्मेलन के आयोजन के लिए देश के कई जगहों से फोन आए. यहां तक कि दिल्ली से भी कई लोगों ने फोन कर इस तरह का आयोजन करने के लिए बधाई दी.’