प्रकृति से लगाव की तरह-तरह की कहानियां हम पढ़ते रहते हैं. कुछ ऐसा ही एक मामला पुणे शहर का है. यहां रहने वाली 79 वर्षीय एक रिटायर प्रोफेसर डॉ. हेमा साने बिना बिजली के पूरी उम्र गुजारने को हैं. डॉ. हेमा का कहना है कि भोजन, घर और कपड़ा इंसान की बेसिक जरूरत है. इसी तथ्य को प्रमाणित करने के लिए वह दशकों से बिना बिजली के रह रही हैं. उनके घर में बिजली होने का सीधा मतलब यह है कि उनके पास आज के जीवन में जरूरी बन चुके तमाम अप्लाइंसेज जैसे फ्रीज, टीवी, वाशिंग मशीन आदि…. भी नहीं हैं.

अपने घर के बारे में डॉ. हेमा का कहना है कि उनकी यह संपत्ति उनके कुत्ते, दो बिल्लियों, नेवलों और तमाम अन्य पक्षियों की है. यह उनकी संपत्ति है न कि मेरी. मैं यहां केवल उनकी देखभाल करने के लिए हूं. उन्होंने कहा कि लोग उन्हें मूर्ख कह कहते हैं, लेकिन इससे कोई अंतर नहीं पड़ता क्योंकि यह मेरा जीवन है और मैं जैसा चाहूं वैसा रह सकती हूं.

डॉ. हेमा एक रिटायर प्रोफेसर हैं और वह पुणे के बुधवार पथ पर रहती हैं. उन्होंने कहा कि भोजन, घर और कपड़े के अलावा उनकी कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि एक समय था जब बिजली नहीं थी. यह काफी बाद में आई. मैं इसके बिना मैनेज कर सकती हूं. किताबों से घिरे घर में डॉ. हेमा जिस तरह रह रही हैं, उससे तो एक बार जरूर यह सोचा जा सकता है कि बिना आधुनिक सुख-सुविधाओं से जीवन चल सकता है.