नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान शहरों में आपको भले ही राष्ट्रवाद, आतंकवाद, जाति-धर्म का शोर सुनाई दे रहा हो, लेकिन शहरों से दूर ऐसे भी इलाके हैं जहां चुनाव में नोटबंदी, बैंकिंग व्यवस्था में गड़बड़ी या अर्थव्यवस्था के मुद्दे उठ रहे हैं. कई क्षेत्रीय दलों के उम्मीदवार इसके बहाने भाजपा के विरोध में चुनाव भी लड़ रहे हैं. एक उदाहरण बिहार के नालंदा में भी देखने को मिला. यहां बुधवार को बहुजन समाजवादी पार्टी के एक उम्मीदवार ने लोकसभा चुनाव का नामांकन फॉर्म खरीदने के लिए अनोखा तरीका अपनाया. दरअसल, पार्टी के नेता शशि कुमार बुधवार को नालंदा कलेक्ट्रेट में लोकसभा चुनाव का नामांकन फॉर्म खरीदने पहुंचे थे. चुनाव लड़ने के लिए जो जमानत राशि दी जाती है, उसके लिए वह झोला भरकर सिक्का ले आए थे.

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फॉर्म देने के बाद जब कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों ने शशि कुमार से जमानत राशि मांगी तो कुमार और उनके समर्थकों ने बड़े-बड़े 4 झोले कर्मचारियों के सामने रख दिए. अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ के अनुसार, नालंदा कलेक्ट्रेट के कर्मचारी पहले तो इन झोलों को देखकर चौंके कि नामांकन फॉर्म के साथ संभावित प्रत्याशी यह क्या लाया है, लेकिन जब उन्होंने झोलों को खोला तो पता चला कि इसमें जमानत राशि लाई गई है. जी हां, शशि कुमार ने लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए जमानत राशि के तौर पर दी जाने वाली राशि झोलों में भरकर लाई थी. उन्होंने कुल 25 हजार रुपए के सिक्के कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों को दे दिए. 25 हजार रुपए के सिक्कों को देख कर्मचारी हैरान रह गए. इनमें ज्यादातर एक और दो रुपए के सिक्के थे, कुछ सिक्के 5 रुपए के भी लाए गए थे. इन सिक्कों की गिनती करने में कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों को दो घंटे से ज्यादा का समय लगा.

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अपनी इस हरकत को शशि कुमार ने जायज ठहराया है. उन्होंने कहा कि छोटे कारोबारियों को व्यापार में इन सिक्कों की वजह से बड़ी तकलीफ हो रही है, क्योंकि छोटे कारोबारियों के पास सिक्के बड़ी तादाद में जमा हो जाते हैं, लेकिन बैंक इसे लेने से इनकार कर देते हैं. कई बैंकों में पैसे जमा करने आने वाले कारोबारियों को इस कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है. कुमार ने कहा कि इसलिए जब वे लोकसभा चुनाव का नामांकन फॉर्म खरीदने आए तो अपने साथ ये सिक्के लेते आए, ताकि सरकार को छोटे कारोबारियों की समस्या का पता चल सके. बहरहाल, अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों ने कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि अगर कोई प्रत्याशी जमानत राशि के तौर पर सिक्के लाए तो उसे पर्चा न भरने दिया जाए. लेकिन ऐसी हरकत से हम कर्मचारियों का समय खराब होता है.

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