लखनऊ: कुछ मुट्ठी भर लोगों द्वारा कभी हिंदू-मुस्लिम तनाव तो कभी मंदिर-मस्ज़िद पर बहस और झगड़ा या कुछ ऐसा ही देखने-सुनने को मिल जाता है. इसी बीच एक मुस्लिम परिवार है जिसने फिजाओं में मोहब्बत की खुशबू बिखेरी हुई है. लखनऊ के इस मुस्लिम परिवार में कभी पिता साबिर खान दशरथ बनते हैं तो कभी बेटा श्रीराम के किरदार में होता है. सिर्फ यही नहीं बल्कि पूरा परिवार रामलीला के मंचन में किसी न किसी भूमिका में नजर आता है. इस रामलीला का आयोजन भी ये मुस्लिम परिवार ही करता है. इन दिनों रामलीला का आयोजन चल रहा है.

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तीन पीढ़ियों से परिवार करा रहा आयोजन
देश के अलग-अलग हिस्सों में रामलीलाएं होती हैं, लेकिन तहज़ीब, नज़ाकत और नवाबों के शहर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की रामलीला का मिजाज कुछ अलग है. शहर के बक्सी के तालाब से होने वाली रामलीला ख़ास मानी जाती है. यहां के रहने वाले साबिर खान इसके डायरेक्टर होते हैं. वह दशरथ के साथ ही जनक, विश्वामित्र, कुम्भकरण, रावण सहित कई अन्य भूमिका निभाते आए हैं. उनके दो बेटे भी भूमिकाएं निभाते हैं. साबिर खान बताते हैं कि उनके पोते भी मंचन में अभिनय करते हैं. घर की महिलाएं इसकी तैयारी करती हैं. साबिर खान बताते हैं कि यह पहला मौका नहीं है, बल्कि पिछली तीन पीढ़ियों से उनका परिवार रामलीला का आयोजन कराता आ रहा है. 1972 में पहली बार इसकी शुरुआत की गई थी.

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हिंदू कलाकार भी लेते हैं हिस्सा
साबिर खान के बेटे शेर खान बताते हैं कि सिर्फ हम ही नहीं बल्कि रामलीला में हिंदू परिवार भी हिस्सा लेते हैं. वह बताते हैं कि लोग उन्हें पूरा सम्मान और सहयोग देते हैं. लोग रामलीला के लिए किसी भी तरह की मदद को आतुर रहते हैं. इलाके के श्याम मोहन कहते हैं कि यह रामलीला बेहद ख़ास है. यह दिखाता है कि हर किसी को हर मज़हब का सम्मान करना चाहिए. और बक्शी का तालाब के इस परिवार ने तो मिसाल कायम की है. लखनऊ का रंग कुछ ऐसा ही है, जिसमें अधिकतर लोग ऐसे ही घुले-मिले हैं.