एंकरेज. आपने मार्केटिंग की दुनिया की वो कहावत तो सुनी ही होगी कि वो दुकानदार ही क्या जो गंजे को कंघी न बेच दे! पर्यटन की दुनिया में कुछ ऐसा ही आजकल अलास्का में देखने को मिल रहा है. ग्लोबल वार्मिंग और अन्य कारणों से अलास्का के ग्लेशियर लगातार पिघल रहे हैं. इन पिघलते ग्लेशियरों को बचाने की कवायद में दुनियाभर के पर्यावरणकर्मी लगे हुए हैं. लेकिन इसके बीच अलास्का के कुछ टूर ऑपरेटर्स ऐसे भी हैं जिन्होंने इन पिघलते ग्लेशियरों से भी कमाई करने का तरीका ढूंढ लिया है. जी हां, अलास्का के टूर संचालकों के लिए जलवायु परिवर्तन के कारण तेजी से पिघलते ग्लेशियर नए बाजार बन रहे हैं.

एंकरेज डेली न्यूज ने रविवार को खबर दी कि टूर कंपनियों के कई संचालकों के पास ऐसी ट्रिप बुक कराने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ रही है, जो राष्ट्र के एकमात्र आर्कटिक राज्य के पिघलते ग्लेशियरों को देखना चाहते हैं. इन ग्राहकों की इच्छा है कि वह ग्लेशियरों के पूरी तरह पिघल जाने से पहले उन्हें देख लें. ऐसे ग्राहकों को उनका सही टूरिस्ट स्पॉट ढूंढने में ये टूर ऑपरेटर्स मदद कर रहे हैं.

ग्लेशियर शोध डेटा की एक नई समीक्षा में अनुमान जताया गया है कि अलास्का के 25,000 ग्लेशियर इस सदी के अंत तक अपना 30 से 50 प्रतिशत द्रव्यमान गंवा चुके होंगे. एक टूर संचालक ने कहा कि पर्यटकों के बीच घटते ग्लेशियर को लेकर “ज्यादा जागरुकता” है. संचालकों ने कहा कि उन्होंने ऑस्ट्रेलिया जैसे स्थानों से भी यहां के लिए दिलचस्पी देखी है जहां ग्लेशियर नहीं होते. साथ ही चीन एवं भारत जैसे उभरते पर्यटन बाजारों से आने वाले आगंतुकों की भी ग्लेशियरों में दिलचस्पी बढ़ी है.

(इनपुट – एजेंसी)