नई दिल्लीः कोरोना वायरस (Corona Virus) के बीच देश में जारी हुए लॉकडाउन (Lockdown) में सबसे ज्यादा समस्याएं प्रवासी मजदूरों के सामने आ खड़ी हुई हैं. ऐसे मजदूर जो अपने घर-परिवार से दूर दूसरे राज्यों और शहरों में जाकर काम कर रहे हैं. लॉकडाउन के बीच ना तो इनकी मजदूरी का ठिकाना रह गया है और ना ही खाने का. ऐसे में मजबूर होकर ये अपने-अपने घर-गांव लौटना चाहते हैं. लेकिन, लॉकडाउन के बीच आवा-जाही के भी साधन बंद हैं. कई राज्य सरकारें अपने नागरिकों को वापस लेकर भी आ रही हैं, लेकिन जानकारी के आभाव में हर किसी तक इसकी जानकारी भी नहीं पहुंच पा रही है. ऐसे में सैकड़ों-हजारों की संख्या में मजदूर बड़े शहरों से पैदल ही अपने घरों के लिए निकल रहे हैं. Also Read - महाराष्‍ट्र में कोरोना से आज 85 मौतें के साथ अब तक करीब 2000 मृत, कुल 60 हजार पॉजिटिव केस

इस बीच कई ऐसी कहानियां भी सामने आईं, जिन्होंने लोगों को अंदर तक झकझोर कर रख दिया. ना खाने का ठिकाना और ना ही रात काटने का. सैकड़ों मील और कई-कई दिन पैदल चलकर मजदूर अपने घर पहुंच रहे हैं. ऐसा ही हाल है त्रिलोकी कुमार का. जो अपने कुछ साथियों के साथ गोरखपुर के पिपराइच के लिए सूरत से पैदल निकला है. Also Read - ICC Meeting: टी20 विश्‍व कप 2020 के भविष्‍य को लेकर फैसला 10 जून तक स्‍थगित

पैदल चलते रहने की वजह से त्रिलोकी और उसके साथ के अन्य लोगों के पैरों में फोड़े पड़ गए हैं. जिनके दर्द के आगे उन्हें रोटी का भी ख्याल नहीं है. त्रिलोकी और उसके साथियों से जब खाने के लिए पूछा गया तो त्रिलोकी न कहा कि, ‘साहब एक पुरानी चप्पल दे दो. रोटी तो मिल जाएगी.’ Also Read - दिल्ली से पटना फ्लाइट से गए मजदूर, एयरपोर्ट पर बोले- चप्पल पहनी हैं, हमें विमान में घुसने देंगे?

त्रिलोकी और उसके साथियों के मुताबिक, उन्होंने श्रमिक ट्रेन के लिए पंजीकरण कराया था. करीब एक सप्ताह तक इंतजार करने के बाद भी जब कोई फोन और चिट्ठी नहीं मिली तो पैदल ही घर जाने का फैसला किया. इन मजदूरों के मुताबिक, कहीं और मरने से अच्छा है कि वह अपने घर में अपने परिवार के साथ मरें. बता दें देश में 24 मार्च से लॉकडाउन जारी है.

ऐसे में दिहाड़ी मजदूर काम ना मिलने के चलते परेशान हैं. दूसरी जगह उनके लिए बिना काम और रोजी रोटी के दिन काट पाना मुश्किल हो रहा है, जिसके चलते वह सरकार से लगातार अपने-अपने घर जाने की अपील कर रहे हैं.