कोलकाता. इंसान अगर ठान ले कि उसे कुछ कर के दिखाना है, तो उसकी राह कोई नहीं रोक सकता. जिंदगी की राह में चाहे कितनी ही मुसीबतें क्यों न आए, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित व्यक्ति को उसके मुकाम तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता. कुछ ऐसी ही नजीर पेश की है कोलकाता की जेल में बंद एक नक्सली ने. जी हां, गैरकानूनी गतिविधि निरोधक कानून (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार और वर्तमान में यहां स्थित प्रेजीडेंसी सुधार गृह में बंद एक माओवादी रविवार को राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा (एसएलईटी) में बैठा. अधिकारियों ने बताया कि जो एसएलईटी (SLET) उत्तीर्ण करते हैं वे राज्य सरकार संचालित कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त होने के लिए पात्र हो जाते हैं.

प्रतिबंधित भाकपा माओवादी का पूर्व सदस्य अर्णब दाम एसएलईटी परीक्षा में शामिल हुआ. उसे 2012 में गिरफ्तार किया गया था. उसे 2010 में ईस्टर्न फ्रंटियर राइफल्स के सिलदा स्थित शिविर पर नक्सली हमले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था. 40 वर्षीय अर्णब एक सेवानिवृत्त न्यायिक मजिस्ट्रेट का पुत्र है जो 1998 में आईआईटी खड़गपुर से पढ़ाई छोड़कर नक्सली बन गया था.

सुधारगृह के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि अर्णब ने स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री जेल में रहते हुए इतिहास के विषय में हासिल की. अधिकारी ने कहा, ‘‘अर्णब ने दोनों ही परीक्षाएं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की. उसने पीएचडी के लिए विभिन्न विश्वविद्यालयों में आवेदन किया है.’’

(इनपुट – एजेंसी)