अगर आप हाल ही में मां बनी हैं या पिता बने हैं, तो आजकल घर में अक्सर गूंजने वाली किलकारियों से आपकी तबीयत खुश हो जाती होगी. न्यू बॉर्न (New Born Baby) बेबी के रोने की आवाज से मां का तो कलेजा भर आता है, पिता भी एक अद्भुत खुशी से भर उठता है. बच्चों के जन्म के बाद रोने की यह आदत अच्छी मानी जाती है. बच्चे भूख लगने, प्यास लगने, नींद आने, पेशाब करने डायपर बदलने या फिर अपनी किसी भी जरूरत के लिए रो कर ही मां को आवाज लगाते हैं. लेकिन क्या कभी आपने यह गौर किया है कि नवजात बच्चे रोते हुए खूब-खूब जोर-जोर से चिल्लाते हैं, लेकिन उनकी आंख से आंसू नहीं आते. ऐसा क्यों होता है? इसका जब कारण जानेंगे तो हैरत में पड़ जाएंगे.

नवजात बच्चे क्या अपनी मांग पूरी करने के लिए रोने का नाटक करते हैं या यह जान-बूझकर लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश है, ऐसा सोचने से पहले नवजातों की आंखों से आंसू न आने का कारण जान लीजिए. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक 3 महीने से ज्यादा उम्र के नवजात या आम वयस्क इंसानों में भी, आंसू के लिए एक Tear-duct होता है. बादाम के दाने जितनी आकार के ये Tear-duct ही ऐसा तरल पदार्थ छोड़ते हैं जो आंसू के रूप में शरीर से बाहर आता है.

यानी जब हम रोते हैं तो इसी Tear-duct से निकले आंसुओं के कारण हमारी रोनी सूरत किसी को नजर आती है. लेकिन नवजात बच्चों में जन्म के शुरुआती दो या 3 हफ्तों तक Tear-duct पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ होता है. इस कारण जब ये बच्चे रोते या चिल्लाते हैं तो आवाज पूरे जोर की आती है, लेकिन आंसू किसी को नजर नहीं आते. चाइल्ड स्पेशियलिस्टों के अनुसार कई नवजात बच्चों में Tear-duct के विकसित होने में 1 से 2 महीने तक लग जाते हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार आंखों से आंसू निकलना हमारी आंख की सेहत के लिए अच्छा होता है. दरअसल, आंसुओं के निकलने की पूरी प्रक्रिया एक ड्रेनेज-सिस्टम की तरह काम करती है. ये Tear-duct हमारी आंख के कोने पर नाक के अंदरूनी सिरों को छूते हुए इस तरह व्यवस्थित होते हैं कि जैसे ही आंख में धूल पड़ती है या कीड़े-मकोड़े की चोट, तत्काल इससे आंसुओं का स्राव शुरू हो जाता है. इसलिए आपने गौर किया होगा कि अचानक धूल पड़ने के बाद जब आप अपनी आंखों को मीचते हैं तो उससे आंसू निकलते हैं और आपकी आंखें साफ हो जाती हैं.