मुंबई. देश की लंबी दूरी की सबसे पुरानी रेलगाड़ियों में से एक पंजाब मेल ने बीते शनिवार को 107 बरस पूरे कर लिए. पंजाब मेल शुरुआत में गोरे ‘साहबों’ यानी सिर्फ अंग्रेजों को ही सेवाएं देती थी. लेकिन जल्द ही इसमें निचले वर्ग के लोगों को भी सफर करने की अनुमति मिल गई और 1930 के दशक के मध्य में. 1945 में इसे वातानुकूलित किया गया. अब यह बिजली के इंजन से चलती है. पंजाब मेल के 107वें जन्मदिन पर पंजाब में इसके यात्रियों ने खास अंदाज में ट्रेन का हैप्पी बर्थडे सेलिब्रेट किया. लोगों ने कोट कपूरा जंक्शन पर ट्रेन के आते ही मिठाइयां बांटी. स्टेशन पर मौजूद यात्रियों को मिठाई खिलाकर इस खास ट्रेन का जन्मदिन मनाया गया. लोगों ने इस मौके के लिए खासतौर से केक भी बनवाया था, जिस पर हैप्पी बर्थडे पंजाब मेल लिखा गया था.

एक समय ‘पंजाब लिमिटेड’ के नाम से पुकारी जाने वाली पंजाब मेल की शुरुआत एक जून 1912 को मुम्बई से पेशावर (अब पाकिस्तान का शहर) के बीच हुई थी. मध्य रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी सुनील उदासी ने बताया कि विभाजन से पहले पंजाब मेल मुम्बई के बलार्ड पियर मोल स्टेशन से पेशावार के बीच चलती थी. यह 47 घंटे में 2,496 किलोमीटर का सफर पूरा करती थी. यह ब्रिटिश भारत की सबसे तेज रफ्तार वाली रेलगाड़ी के रूप में जानी जाती थी. अब यह ट्रेन मुम्बई से फिरोजपुर छावनी के बीच चलती है तथा 34 घंटे, 15 मिनट में 1,930 किलोमीटर का सफर पूरा करती है.

इधर, एक जून को ही मुंबई और पुणे को जोड़ने वाली डेक्कन क्वीन का भी जन्मदिन है. यह प्रसिद्ध रेलगाड़ी शनिवार को 89 बरस की हो गई. डेक्कन क्वीन की शुरुआत एक जून 1930 को मध्य रेलवे के अग्रदूत ग्रेट इंडियन पेनिन्सुला रेलवे ने की. उदासी ने कहा कि यह पहली डीलक्स ट्रेन थी, जो क्षेत्र के दो महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ती थी. इसका नाम उस समय क्वीन ऑफ डेक्कन कहे जाने वाले पुणे के नाम पर रखा गया था.

(इनपुट – एजेंसी)