Rahat Indori Shayari And Ghazal: राहत इंदौरी तारीख़ी शायर हैं. देश ही नहीं पूरी दुनिया में अपने अंदाज़ के साथ शायरी कहने वाले राहत इंदौरी (Rahat Indori) हर दिल अज़ीज़ हैं. मुशायरों में उनका हर लफ़्ज़ न सिर्फ तालियां बटोरता है, बल्कि उनके अंदाज़ पर भी लोग ला जवाब हो जाते हैं. शायरी की दुनिया के चमकते सितारे राहत इंदौरी ने कई तरह की शायरी की. ग़ज़ल, नज़्में पढ़ीं जो खूब मशहूर हुईं. वहीं, राहत इंदौरी ने कुछ ऐसा भी रचा, जिसमें चुनौती भी है और चुनौती बनकर टकराने का माद्दा भी. ‘किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है’ (Kisi ke baap ka Hindustan thodi hai) राहत इंदौरी की ऐसी ही ग़ज़ल है, जो पैग़ाम भी बन चुकी है. ये ग़ज़ल न सिर्फ लोकप्रिय हुई, बल्कि आंदोलनों में लोगों द्वारा अपनी बात कहने का जरिया भी बना ली गई. पढ़ें… Also Read - आखिरी सफर: सुपुर्दे-खाक किए गए 'ए मौत तूने मुझे ज़मीदार कर दिया' कहने वाले राहत इंदौरी

‘किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है’ (Kisi Ke Baap ka Hindustan Thodi hai)

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अगर खिलाफ हैं, होने दो, जान थोड़ी है
ये सब धुँआ है, कोई आसमान थोड़ी है Also Read - राहत इंदौरी: शायरी में बगावत थी तो मोहब्बत भी, 'किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है... कहने पर बजती रहती थी तालियाँ

लगेगी आग तो आएंगे घर कई ज़द में
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है

मैं जानता हूँ कि दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है

हमारे मुंह से जो निकले वही सदाक़त है
हमारे मुंह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है

जो आज साहिब-इ-मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं जाती मकान थोड़ी है

सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है.

राहत इंदौरी के मशहूर शेर (Rahat Indori Shayari)

 

आँख में पानी रखो होठों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो

बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ

तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो

अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए
कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए

न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा
हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा

मेरी ख्वाहिश है कि आंगन में न दीवार उठे
मेरे भाई, मेरे हिस्से की ज़मीं तू रख ले