Real Heros:  बिहार के भागलपुर जिले के एक चौकीदार सचिन उर्फ सिंघम पासवान अपनी ड्यूटी करने के अलावा स्लम के बच्चों को एकत्रित कर पढ़ाते भी हैं. सिंघम का कहना है कि वे खुद ज्यादा नहीं पढ़ सके, जिसकी कसक आज भी उनके मन में हैं. अब वे इन बच्चों के लिए एक छोटी कोशिबिहार के भागलपुर जिले के एक चौकीदार सचिन उर्फ सिंघम पासवान अपनी ड्यूटी करने के अलावा स्लम के बच्चों को एकत्रित कर पढ़ाते भी हैं. श कर रहे हैं. सिंघम के इस कार्य के लिए बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गुप्तेश्वर पांडेय भी तारीफ कर चुके हैं. Also Read - Coronavirus in Bihar: सात हजार के पार पहुंची बिहार में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या, जानें कहां कितने मामले

कौन है स‍िंघम पासवान
भागलपुर जिले के नाथनगर थाने में पदस्थापित चौकीदार सचिन उर्फ सिंघम ड्यूटी के अलावे बच्चों को ककहारा भी सिखाते हैं. सिंघम कहते हैं कि उनकी ड्यूटी रेलवे स्टेशन के आसपास लगी थी, जहां कई छोटे बच्चों को सड़कों पर दिनभर खेलते और घूमते देखा. जब इन बच्चों से उनसे पढ़ाई को लेकर बात की तब यह जान पाया कि इन बच्चों में पढ़ने की ललक तो है, लेकिन साधनों का अभाव और जागरूकता नहीं होने के कारण ये बच्चे स्कूल नहीं जा रहे. Also Read - Coronavirus in Bihar Update: 24 घंटे में 193 नए मामले , संक्रमित लोगों की संख्या 6,289 हुई

चलता पाठशाला
इसके बाद सचिन उर्फ सिंघम ने ‘चलता पाठशाला’ खोल दिया. सिंघम प्रतिदिन ऐसे बच्चों को एकत्र करते और पढ़ाते हैं. अब सिंघम के लिए यह कार्य दिनचर्या में शामिल हो गया. सचिन बच्चों को पाठ्य सामग्री भी उपलब्ध कराते हैं. लगभग एक दर्जन से अधिक बच्चे रोजाना समय पर उनके पास पढ़ने पहुंच जाते हैं. Also Read - Covid-19 Cases in Bihar: प्रवासियों के लौटने के बाद तेजी से फैला संक्रमण, 206 नए मामले, कुल 3, 565 संक्रमित, जानें कहां कितनी संख्या

बिहार पुल‍िस ने क्‍या कहा
इसकी जानकारी जब बिहार के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय को मिली तो उन्होंने रविवार को सचिन से फोन पर बात की. सचिन डीजीपी की फोन आने के बाद पहले तो आश्चर्यचकित थे, लेकिन फिर उन्होंने बात की. डीजीपी ने चौकीदार से वादा किया कि वे खुद उन बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च उठाएंगे. भागलपुर आने पर वह उन बच्चों से मुलाकात भी करेंगे. डीजीपी ने चौकीदार से कहा कि अपराधी और शराब माफियाओं से वह किसी भी प्रकार का संबंध नहीं रखें.

सच‍िन की जुबानी
चौकीदार सचिन ने कहा, “स्नातक प्रतिष्ठा की पढ़ाई कर रहा था. 2007 में पिता के स्वर्गवास के बाद पढ़ाई नहीं कर सका. परिवार की जिम्मेदारी आ पड़ी, पिता चौकीदार थे, उनकी जगह चौकीदारी मिली. पढ़ने-पढ़ाने की कसक थी, जो लॉकडाउन में बच्चों को पढ़ाकर पूरी कर रहा हूं.”

उन्होंने कहा कि इन बच्चों को सड़कों पर घूमते देखा था. वे कहते हैं कि ये बच्चे अब पढ़ाई के महत्व को समझेंगे तो खुद स्कूल जाने लगेंगे.
(एजेंसी से इनपुट)